भाजपा ने जल बोर्ड में हुए 26,000 करोड़ रुपये घोटाले के खिलाफ चलाया मेट्रो जनसंपर्क अभियान

@ chaltefirte.com                                                       नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड में हुए घोटाले के खिलाफ आज दिल्ली के सभी 183 मेट्रो स्टेशनों के सामने भारतीय जनता पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में जनसंपर्क चलाया। जल बोर्ड में हुए 26,000 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर चलाए गए इस जनसंपर्क अभियान में अलग-अलग स्टेशनों पर भाजपा कार्यकर्ता घोटाले की जानकारी लिखी टी-शर्ट पहनकर जनता तक जानकारी पहुंचाई। राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के बाहर कार्यकर्ताओं व जनता को सम्बोधित करते हुये  आदेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि 6 सालों में दिल्ली के विकास को रोक दिया गया है। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष  अशोक गोयल देवराह, प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष  योगिता सिंह व सभी मोर्चों के अध्यक्ष उपस्थित थे।

 आदेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार ने सभी सीमायें तोड़ दी हैं और केजरीवाल ने जो भी वायदे किये थे उन्हें पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने ग्रीन बजट के नाम से एक बजट दस्तावेज जारी किया था, लेकिन उसमें प्रदूषण कम करने के जो भी उपाय सुझाये गये उन्हें आज तक लागू नहीं किया गया।केजरीवाल सरकार की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुये कहा कि पराली को खाद में बदलने के लिये 40 हजार रूपये की दवाई की खरीद की गई और उसके वितरण पर 40 लाख रूपये खर्च कर दिये गये जबकि प्रचार पर 7 करोड़ रूपये खर्च कर दिये गये।

प्रदेश अध्यक्ष  ने जनसंपर्क अभियान में कहा कि जल बोर्ड के सबसे बड़े घोटाले को उजागर करने के लिए यह जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। दिल्ली की जनता जानना चाहती है कि आखिर करोड़ों रुपये कहां गए। दिल्ली की जनता को साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। जनता बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं।उन्होने कहा कि केजरीवाल सरकार ने 26,000 करोड़ के इस घोटाले पर चुप्पी साधी हुई है, लेकिन दिल्ली के जनता की आवाज बनकर हम तब तक सवाल करते रहेंगे और हमारा संघर्ष तबतक जारी रहेगा जबतक केजरीवाल इन पैसों का हिसाब नहीं देते। दिल्ली जल बोर्ड की राजधानी के सभी क्षेत्रों में पानी और सीवर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है लेकिन प्रदेश के 30 प्रतिशत क्षेत्रों में पानी उपलब्ध नहीं है और लगभग 1600 कालोनियों में सीवर की व्यवस्था नहीं है। सरकार की ओर से जल बोर्ड को जो धनराशि मिलती है उसकी पूरी जानकारी ना जल बोर्ड के पास है और ना हीं केजरीवाल सरकार के पास है। यह राशि जनता के करों (टैक्स) की है जिसका हिसाब केजरीवाल सरकार को देना ही पड़ेगा।

 

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