नई शिक्षा नीति से युवाओं को मिलेंगे नए पंख-गुलाब देवी

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में दो दिनी एजुकेशन कॉन्क्लेव - 2021 का शंखनाद 

@ chaltefirte.com                                                        मुरादाबाद। माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री  गुलाब देवी ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में उम्मीद जताई, प्राइमरी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक नई शिक्षा नीति-एनईपी के जरिए युवाओं को नए पंख मिलेंगे। मिसाइल मैन एवं जाने-माने शिक्षाविद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का भावपूर्ण स्मरण करते हुए बोलीं, डॉ. कलाम कहते थे, सपने वे नहीं है, जो हम नींद में देखते है। सपने वे हैं, जो हमको नींद नहीं आने देते हैं। नई शिक्षा नीति युवाओं के सपनों को साकार करेगी। वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के ऑडी में फैकल्टी और ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेज- एफओईसीएस की ओर से आयोजित दो दिनी एजुकेशन कॉन्क्लेव – 2021 में बोल रही थीं। इससे पूर्व माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री के संग-संग एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लों, कुलाधिपति  सुरेश जैन और डीआईओएस  प्रदीप कुमार द्विवेदी ने माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करके एजुकेशन कॉन्क्लेव – 2021 का शंखनाद किया। इस मौके पर जीवीसी मनीष जैन, रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा, एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी,  छात्र कल्याण निदेशक प्रो. एमपी सिंह, एसोसिएट डीन डॉ. मंजुला जैन, डीपीएस के प्राचार्य श्री सुदर्शन सोनार की गरिमामयी मौजूदगी रही। माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती गुलाब देवी, एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लों समेत मंच पर मौजूद सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। एजुकेशन कॉन्क्लेव – 2021 में शिरकत करने आए अंग्रेजी और हिंदी मीडियम के 100 से अधिक प्राचार्यों को बारी-बारी से शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया। इस मौके पर एसएंडटी रिव्यू जर्नल और अनलॉक द नॉलेज पत्रिका का भी विमोचन हुआ। एजुकेशन कॉन्क्लेव – 2021 का आगाज एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी की एजुकेशन कॉन्क्लेव थीम से हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उम्मीद जताई, एजुकेशन कॉन्क्लेव मील का पत्थर साबित होगी। अंत में रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा ने सभी अतिथियों का एजुकेशन कॉन्क्लेव – 2021 की शोभा बढ़ाने के लिए आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ. सोनिया जयंत और नेहा आनंद ने किया।

एजुकेशन कॉन्क्लेव – 2021 में एनईपी का श्रेय यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और लोकप्रिय मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ को देते हुए  गुलाब देवी ने कहा, ये दोनों देव पुरुष की मानिंद हैं। शिक्षक समाज का प्रतिबिम्ब है, जबकि माँ बच्चे की पहली गुरु होती है। बोलीं, गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय, बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय… क़बीरदास के दोहे  सरीखी हमारी शिक्षा की परम्परा रही है। उन्होंने बेहिचक स्वीकार किया, पुरानी शिक्षा पद्धति के तहत प्राइमरी शिक्षा की हालत दयनीय है, लेकिन न्यू एजुकेशन पॉलिसी से प्राइमरी शिक्षा के दिन बहुर जाएंगे। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से फर्जी शिक्षकों ने असल गुरुओं का दामन दागदार किया है। सच्चाई यह है, शिक्षक समाज में जागृति का संवाहक है, युवाओं का चरित्र निर्माण करता है, भारतीय संस्कृति और संस्कारों के प्रति समर्पित होता है और नकारात्मक विचारों को सकारात्मकता में परिवर्तित करता है। माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री कोरोना को बड़ा शत्रु बताते हुए बोलीं, यह फिर से सिर उठा रहा है, इसीलिए डब्ल्यूएचओ की तय गाइडलाइन्स के तहत हमें सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करना है। मास्क को नहीं छोड़ना है। जीवन-मरण की इस लम्बी लड़ाई में कुलाधिपति सुरेश जैन और जीवीसी मनीष जैन के उल्लेखनीय योगदान की चर्चा करते हुए बोलीं, टीएमयू कोविड-19 हॉस्पिटल का आला प्रबंधन केंद्र और प्रदेश सरकारों के दिशा-निर्देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता रहा है और चल रहा है। इसके लिए कुलाधिपति  सुरेश जैन और जीवीसी  मनीष जैन को साधुवाद देती हूँ।

कुलाधिपति सुरेश जैन बोले, इसमें कोई शक नहीं है कि गांव-गांव और कस्बे-कस्बे में शिक्षा के मंदिर खुले हैं, लेकिन दुर्भाग्य यह है, स्नातक उत्तीर्ण छात्र जॉब के लिए एक अर्जी भी ड्रफ्ट नहीं कर पाता है। यह हमारी शिक्षा प्रणाली का ही दोष है। अब नॉलेज का जमाना है, डिग्री का नहीं। अब काबिलियत चलेगी। अपने सारगर्भित सम्बोधन से पूर्व ऑडी में मौजूद सभी शिक्षावादों का दिल की गहराइयों से खैरमकदम करते हुए बोले, हम तो इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करते हैं, लेकिन आप देश बनाते हैं। उन्होंने शिक्षाविदों से नई शिक्षा नीति को मेहनत और ईमानदारी से क्रियान्वयन करने का आग्रह किया ताकि आने वाली पीढ़ी काबिलियत की कसौटी पर खरा उतर सके।

बतौर मुख्य अतिथि एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लों एनईपी की खूबियां गिनाते हुए बोले, मैकाले की शिक्षा नीति ने केवल बाबू ही पैदा किए हैं, लेकिन नई शिक्षा नीति से युवाओं के लिए नए द्वार खुलेंगे। उन्होंने एनईपी को युवाओं के लिए वरदान बताते हुए कहा, उच्च शिक्षा में जहां एक ही वक्त में दो-दो डिग्री लेने का प्रावधान है, वहीं प्राइमरी तक बच्चे अब मातृभाषा में पढ़ाई कर सकेंगे। इससे भारत की मेधा का विदेशी पलायन रुकेगा। अपनी ऐतिहासिक जीत से गदगद डॉ. ढिल्लों ने ऑडी में मौजूद शिक्षाविदों का शुक्रिया अदा करते हए कहा, अब तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी समेत वित्त विहीन स्कूलों के शिक्षकों को एमएलसी चुनाव में वोट देने का अधिकार हासिल हो गया है। अब ये अपना पसंदीदा एमएलसी चुन सकेंगे ताकि इनकी आवाज विधान परिषद में बुलंद हो सकेगी। इससे पूर्व डीआईओएस  प्रदीप कुमार द्विवेदी बतौर गेस्ट ऑफ़ ऑनर बोले, शिक्षा एवं शिक्षकों की  राष्ट्र को गौरवशाली बनाने में अहम भूमिका है। लक्ष्य की प्राप्ति में एनईपी का सफल क्रियान्वयन बेहद जरुरी है। शासन के निर्देश पर इसके अनुपालन के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया है। गुरुओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बोले, भारत को सांदीपनि, राम कृष्ण परमहंस और चाणक्य जैसे महान गुरुओं की दरकार है। डीपीएस के प्राचार्य श्री सुदर्शन सोनार ने भी गहनता से न्यू एजुकेशन पॉलिसी के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। एजुकेशन कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में न्यू एजुकेशन पॉलिसी पर तीन शिक्षाविदों ने की-नोट एड्रेस प्रस्तुत किए। शिक्षा निदेशालय, दिल्ली की नीलम कुलश्रेष्ठ, तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी से डॉ. पंकज गोस्वामी ने एनईपी के विभिन्न पहलुओं जबकि टीएमयू के ही डॉ. संदीप वर्मा ने एनईपी की खूबियों और चुनौतियों पर विश्लेषणात्मक व्याख्यान दिया। एजुकेशन कॉन्क्लेव के दूसरे दिन दो सत्र होंगे, जिसमें सात शिक्षाविद अपना नजरिया रखेंगे।

 

 

 

 

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