टाइम बैंक की अवधारणा की भारत में ऐसे हुई शुरुआत

(डॉ. प्रभात कुमार सिंघल,कोटा को जैसा संस्थापक सदस्य पी.सी.जैन ने बताया)

डॉ. प्रभात कुमार सिंघल

टाइम बैंक वस्तुतः पुराने समय का वस्तु विनिमय आर्थर बार्टर सिस्टम की तरह है, जिसके अंतर्गत वस्तुओं का आदान प्रदान किया जाता था । टाइम बैंक में समय का आदान प्रदान करते हैं, किसी वस्तु का नहीं करते अर्थात आप किसी की सेवा कीजिए बदले में जितनी देर आप उसकी सेवा करेंगे उतने घंटे आपके खाते में जमा हो जाएंगे । अर्थात आपने सेवा में दिये समय के बराबर समय कमा लिया ।जब आपको कभी सेवा की आवश्यकता पड़ेगी तो उतने घंटे की सेवा प्राप्त करने के आप अधिकारी हो गए जो दूसरे व्यक्तियों के द्वारा ही दिए जाएंगे । यही मूलतः टाइम बैंक की अवधारणा है। भारत में भी कालांतर से किसान खेती में इसी तरह का प्रयोग करते रहे हैं, जब श्रमिकों की कमी के कारण एक परिवार के सदस्य दूसरे परिवार के खेत में कटाई आदि का काम करते थे और बदले में वह परिवार इनके खेत में कटाई करा देते थे ।
यूं तो टाइम बैंक अवधारणा शायद 19वीं सदी के पूर्वार्द्ध में आ चुकी थी, संभवत जापान से । ऐसा ज्ञात हुआ है कि किसी देश में बुजुर्गों की देखभाल के लिए सरकार के पास धन की कमी होने पर इस अवधारणा का जन्म हुआ । लेकिन इसका का प्रारंभ 1980 में यू एस से माना जाता है, क्योंकि यूएस में ही पहली बार टाइम बैंक या टाइम बैंकिंग को ट्रैडमार्क के अंतर्गत रजिस्टर कराया गया जान पड़ता है। इसलिए यू एस से इसका प्रारंभ माना जाता है । टाइम बैंक के अंतर्गत सेवा लेने या देने के लिए किसी भी प्रकार धन का लेन देन नहीं किया जाता है, अर्थात सेवा लेने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता और सेवा करने के बदले भी कोई धनराशी नहीं मिलती । केवल आपके बैंक खाते में घंटो के रूप में समय जमा या आहरित किया जाता है ।
जानकारी कैसे
टाइम बैंक के बारे में सबसे पहले हमें 2018 के प्रारम्भ में व्हाट्सएप पर आए एक मेसेज से पता चला जिसमें स्विट्जरलैंड में पढ़ रहे एक विद्यार्थी ने अपने अनुभव साझा करते हुए वहाँ के टाइम बैंक का जिक्र किया था । उसकी अकेली रह रही सेवानिवृत मकान मालकिन किसी बुजुर्ग की देखभाल करने जाती थी । एक दिन उसने पूछा कि आपकी अच्छी ख़ासी पेंशन है, घर का मकान है, ईश्वर की दया से किसी प्रकार की कमी भी नहीं है, फिर आप इस उम्र में काम करने क्यूँ जाती हैं । मकान मालकिन ने कहा कि वह पैसे के लिए काम करने नहीं जाती बल्कि सेवा कर अपना समय जमा करने जाती है । उसे उस समय तो कुछ समझ नहीं आया । एक दिन मकान मालकिन बाथरूम में गिर गई और उसको चोट लग गई । उसे हॉस्पिटल ले जाकर प्लास्टर चढ़ाना पड़ा जिस कारण कुछ दिनों के लिए उसे देखभाल के लिए किसी की जरूरत पड़ी । किराएदार ने कहा कि मैं आपकी देखभाल के लिए कुछ दिनों की छुट्टी ले लेता हूँ तो मकान मालकिन ने कहा कि आप चिंता ना करें मैंने टाइम बैंक में आवेदन कर दिया है उनके मेंबर आकर संभाल लेंगे । ये वही टाइम बैंक है जिसमें मैं बुजुर्गों की सेवा करके अपना समय जमा करती थी । अब अन्य मेंबर्स जमा किए समय के बदले उसकी सेवा करेंगे । उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और उसने यह अनुभव साझा किया । इस प्रकार हमें टाइम बैंक के बारे में पता चला । सेवाओं के आपसी इस संव्यवहार का विचार हमें बहुत अच्छा लगा और दिल की गहराइयों तक छू गया ।
जीवन में कभी पढ़ा सुना था कि विचार भाप की भांति होते हैं । इन्हे पकड़ कर नहीं रखो तो हवा में उड़ जाते हैं । अतः तुरंत इस विचार को अपनी पॉकेट डायरी में, जो कि सदैव मेरे साथ रहती है, में नोट कर लिया, ताकि यह बार बार याद दिलाती रहे और इस पर काम करने की आग को जलाए रखे ।
चूंकि व्हाट्सअप पर आए संदेशों की भरमार होती है और उनकी सत्यता भी संदेह के परे नहीं होती, अतः सबसे पहले हमने इसकी सत्यता की जांच करने की ठानी । गूगल ने बताया कि वास्तव में स्विट्जरलेंड में इस तरह का बैंक काम करता है और लोग इसी प्रकार एक दूसरे की मदद करते हैं । और गहराई से छानबीन करने पर कुछ अन्य देशों, यथा जापान, अमेरिका, ब्रिटेन एवं कुछ अन्य देशों में भी इसके कार्यशील होने का पता चला । इसके उद्भव की जानकारी तलाश करने पर ज्ञात हुआ कि एक बार किसी देश में, जिसका नाम अभी भूल रहा हूँ, जहां बुजुर्गों की देखभाल के लिए वहाँ की सरकार बहुत खर्च करती थी, बड़ा आर्थिक संकट आ पड़ा । ऐसे में सरकार ने सबसे पहले बुजुर्गों के लिए आबंटित बजट में भारी कटौती कर दी। इस से उस देश के बुजुर्गों में भारी असंतोष उत्पन्न हो गया और सरकार का विरोध होने लगा । इस दुधारी मार से बचने के लिए वहाँ के किसी अर्थशास्त्री ने टाईम बैंक अवधारणा को जन्म दिया । इससे सरकार पर आर्थिक भार भी नहीं पड़ा और बुजुर्गों की देखभाल की व्यवस्था भी हो गई । इससे हमें प्रेरणा मिली कि हमारे देश में भी, बिना सरकार पर आर्थिक बोझ डाले, ऐसी ही सामाजिक संरचना बनाई जा सकती है ।
लांचिंग की दांस्तान
वह 26 दिस. 2018 का दिन था जब पंजीकरण फाइल करने के बाद हमें बताया गया की अप्रैल 2019 के प्रथम सप्ताह में हमें प्रमाण पत्र मिल जाएगा । अतः हमने 29 अप्रैल 2019 को विधिवत रूप से टाइम बैंक को लॉंच करने का प्लान बनाया । इसके लिए हमने चंडीगढ़ का चुनाव किया क्योंकि वहाँ पंजाब नैशनल बैंक के महाप्रबंधक श्री डी के जैन ने मुख्य आतिथ्य स्वीकार कर पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया था । आखिरकार एक मित्र के सहयोग से 25 अप्रैल को टाइम बैंक के रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र हाथ में आने के बाद सीधे जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर गए और देवाधिदेव से आशीर्वाद लिया । वह दिन भी आ गया जब 29 अप्रैल 2019 को चंडीगढ़ में पंजाब नेशनल बैंक के क्षेत्रीय प्रशिक्षण महाविद्यालय, पंचकुला में बैंक के महाप्रबंधक श्री डी के जैन, अंचल प्रबन्धक द्वारा टाइम बैंक ऑफ इंडिया का आल इंडिया शुभारम्भ हुआ। जो बुजर्गों की सेवा कर अपने लिए सेवा का सुरक्षा कवच “समय” प्राप्त करना चाहते हैं और अधिक जानकारी चाहते हैं वे जयपुर स्थित पी.सी.जैन से उनके मोबाइल न. 9057987666 पर सम्पर्क कर सकते हैं। भारत के इस पहले टाइम बैंक के अल्प समय मे अब तक 1200 सदस्य बन चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की सरकार ने इस दिशा में एक नया कदम उठाते हुए राज्य में देश का पहला सरकारी ‘टाइम बैंक’ खोलने का फैसला किया है। ये टाइम बैंक हर जिले में खोलने का प्लान है। इस टाइम बैंक में आप अपनी इच्छा के अनुसार कोई स्वैच्छिक सेवा देंगे और उसके बदले आपके खाते में उतने ही घंटे जमा कर दिए जाएंगे, जिनका लाभ आप ऐसी ही किसी सेवा के लिए कभी भी ले सकेंगे।राज्य का आनंद संस्थान अपने 50 हजार आनंदकों और स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ ‘समय की अदला-बदली’ के इस नए ‘कॉन्सेप्ट’ पर काम शुरू कर रहा है।

(डॉ. प्रभात कुमार सिंघल को जैसा संस्थापक सदस्य पी.सी.जैन ने बताया)

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