पर्यटन के लिए स्वर्णनगरी जैसलमेर से निकली आशा की किरण

डा. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

कोरोना से प्रभावित पर्यटन क्षेत्र अभी तक उभरने की स्थिति में नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण विदेशी पर्यटकों की आवाजाही शुरु नहीं होना है तो दूसरी और यूरोपीय देशों सहित दुनिया के अनेक हिस्सों में कोरोना का दूसरा दौर आना भी है। ऐसे में पर्यटन उद्योग को बचाना बड़ी चुनौती हो गया है। पर्यटन उद्योग को पटरी पर लाने के लिए सरकार द्वारा स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के योजनावद्ध प्रयास शुरु किए जा रहे हैं। पर स्थानीय पर्यटन को बचाने के लिए जैसलमेर की पहल समूची दुनिया में इस मायने में अनूठी मानी जा सकती है कि यहां के पर्यटन उद्योग को बचाने के लिए स्थानीय उद्यमी आगे आए हैं। दुनिया के देशों में कोरोना के दौर में शायद यह एक मात्र उदाहरण होगा कि पर्यटकों को लाने के लिए पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग बिना किसी लाभ हानि की परवाह किए आगे आए हैं। जैसलमेर में इन दिनों मरु उत्सव चल रहा है। घाटे के चलते पिछले दिनों यहां पर उड़ान भरने वाली स्पाइस जेट कंपनी ने उड़ान बंद करने को निर्णय किया तो स्थानीय प्रशासन और स्थानीय उद्यमी आगे आए और एक मंच पर बैठकर इसका हल निकालने की सकारात्मक सोच विकसित की। जैसलमेर के उद्यमियों ने कम यात्री होने के कारण उड़ानों से होने वाली संभावित हानि की पूर्ति करने का विश्वास दिलाया और इस आशय का समझौता कर स्वर्णनगरी जैसलमेर के पर्यटन को बचाने की अनूठी पहल की है।

दरअसल कोरोना के बाद से देश के अन्य स्थानों की तरह अभी तक जैसलमेर के लिए रेल सेवाएं शुरु नहीं हो सकी हैं वहीं घाटे के चलते स्पाइस जेट ने भी पर्यटकों को लाने के लिए जैसलमेर की उड़ान चालू रखने में असमर्थता व्यक्त कर दी। कंपनी का कहना रहा है कि पर्याप्त यात्री नहीं होने से जैसलमेर स्पाइस जेट की फ्लाइट लाना कंपनी के लिए घाटे का सौदा हो गया है। ऐसे में जैसलमेर के पर्यटन उद्योग को बचाने के लिए युवा जिला कलक्टर आशीष मोदी की कोशिशों से जैसलमेर के पर्यटक कारोबारियों और स्पाइस जेट के बीच एक करार हुआ है कि कंपनी को होने वाले घाटे की भरपाई जैसलमेर के पर्यटक कारोबारी करेंगे। करार के बाद 12 फरवरी को दिल्ली से 57 यात्रियों को लेकर फ्लाइट जैसलमेर पहुंची तो जैसलमेर में खुशी की लहर तो फैली ही इसके साथ ही आने वाले पर्यटकों का परंपरागत तरीके से जोरदार स्वागत भी किया गया।

वैसे भी देखा जाए तो जैसलमेर ही नहीं अपितु दुनिया के सभी देशों में पर्यटन को कोरोना के चलते तगड़़ा झटका लगा है। पिछले दिनों से देशी पर्यटन को अवश्य प्रोत्साहित किया जा रहा है और इससे थोड़ी आशा की किरण भी देखी जाने लगी है। पर्यटन आज बड़ा उद्योग हो गया है। हजारों लोग इस उद्योग से जुड़कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। पर्यटन से स्थानीय नागरिकों यानी की पर्यटन स्थल के आसपास रहने वाले लोगों को तो रोजगार मिलता ही है इसके साथ ही होटल उद्योग, टैक्सी उद्योग, स्थानीय हस्तशिल्प, कलाकारों सहित ना जाने कितने ही लोगों को रोजगार मिलता है। कोरोना के कारण सामान्य स्थिति नहीं होने और विदेशी पर्यटकों की आवाजाही नहीं के बराबर होने के कारण देशी पर्यटकों को ही प्रोत्साहित किया जा रहा है। जहां तक जैसलमेर का प्रश्न है वहां इस समय पर्यटन सीजन है। ऐसे में यदि बाहर से आने वाली हवाई उड़ान के विकल्प पर विराम लग जाता है तो इस साल का पूरा पर्यटन सीजन बेकार ही जाने की स्थिति हो सकती है। जहां तक स्पाइस जेट का कहना है दिल्ली से एक फ्लाइट के संचालन पर करीब 6 लाख की लागत आती है। करार के बाद जो पहली फलाइट जैसलमेर पहुंची है उसमें भी केवल 57 पर्यटक आए हैं जबकि 90 सीटें होने से 33 सीटे खाली रही है। करार के अनुसार तीन दिन दिल्ली से फ्लाइट आने के साथ ही तीन दिन अहमदाबाद से फ्लाइट आएगी। पाक्षिक आधार पर लाभ हानि का हिसाब होगा और यदि नुकसान रहता है तो उसे जैसलमेर के पर्यटन कारोबार से जुड़े कारोबारियों द्वारा वहन किया जाएगा।

खैर जहां तक जैस्लमेर के जिला प्रशासन और पर्यटन कारोबारियों की पहल का प्रश्न है उसकी जितनी सराहना की जाए वो इस मायने में कम है कि उन्होंने पर्यटन मानचित्र पर जैसलमेर को इन हालातों में भी बनाए रखने की पहल की है। पर केन्द्र सरकार को भी पर्यटन उद्योग को राहत देने के प्रयास करने ही होंगे। लगभग एक साल से बंद पर्यटन उद्योग को सरकारी राहत की दरकार है। इसके लिए सरकार को आगे आकर पहल करनी चाहिए व पर्यटन स्थलों तक लोगों की पहुंच को सहज बनाए रखने और इससे होने वाली हानि को सब्सिडी के रुप में संबंधित हवाई सेवा उपलब्ध कराने वाले संस्था को देने के लिए आगे आना चाहिए। इसी तरह से होटल उद्योग व अन्य उद्योगों को राहत पैकेज देने की पहल होनी चाहिए ताकि इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को राहत मिल सकें।

वैसे भी कोरोना के कारण लंबे समय तक प्रभावित रहने वाले उद्योगों में से पर्यटन और इससे जुड़ी गतिविधियां प्रमुख है। इस उद्योग और इससे जुड़ी गतिविधियों को पटरी पर लाने में अभी समय लगेगा, ऐसे में सरकारी सहयोग व पैकेज की दरकार इस उद्योग को बचाए रखने के लिए जरुरी हो जाती है। पर्यटन को बड़े कारोबारियों तक ही जोड़कर नहीं देखा जा सकता बल्कि इसे समग्र रुप में देखना होगा, पर्यटक आता है तो स्थानीय स्तर पर वाहनों, होटलों, पेंइंग गेस्ट के रुप में रहने वाले पर्यटकों को उपलब्ध कराने वालों, स्थानीय युवाओं खासतौर से गाइड के रुप में सेवाएं देने वालें स्थानीय लोगों, स्थानीय कलाकारों, शिल्पियों के उत्पादों को बाजार मिलता है और शिल्प की विश्वव्यापी पहचान बनती है। ऐसे में इसे केवल घूमने घामने तक ही सीमित नहीं समझ कर इसे समग्र रुप से समझना होगा कि पर्यटन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से कितने लोगों को रोजगार मिलता है। इसलिए यह जरुरी हो जाता है कि सरकार को इस उद्योग के लिए कोई ना कोई राहत पैकेज देना ही होगा ताकि इस उद्योग से जुड़े लोगों को रोजगार मिल सके। सबसे बड़ी बात यह है कि इस क्षेत्र से रोजगार प्राप्त करने वाले असंगठित क्षेत्र के लोग होते हैं और उनकी रोजी रोटी इसी पर निर्भर होती है। ऐसे में जैसलमेर एक उदाहरण के रुप में उभरा है पर इसी तरह के प्रयास अन्य पर्यटन क्षेत्रों में भी करना होगा। सरकार को आगे बढ़कर इस तरह के क्षेत्रों को चिन्हित करते हुए आसानी से पहुंच बनानी होगी। सरकार की छोटी सी पहल इस उद्योग को नया जीवन दे सकेगी।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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