ग्रुप 23 के नेताओं की हुंकार से कांग्रेस में बवाल

बाल मुकुन्द ओझा

कांग्रेस आजादी के आंदोलन की पार्टी है। आजादी के दौरान भी कांग्रेस कई गुटों में विभाजित थी। मगर महात्मा गाँधी सब के सर्वमान्य नेता थे। पार्टी कभी गरम और नरम दल में विभाजित थी। बाद में समाजवादियों ने अपना अलग मंच बनाकर पार्टी को अलविदा कह दिया था। आजादी के बाद कांग्रेस समाजवादी मंच और नेहरू मंच के नाम से नेताओं के अलग अलग मंच सक्रीय थे। युवा तुर्कों का अपना अलग गुट था जिसमें चंद्र शेखर, मोहन धारिया और कृष्णकांत सरीखे नेता थे। ये सभी नेता कांग्रेस में बदलाव के हिमायती थे। आज एक बार फिर जी – 23 के नाराज नेताओं का एक ग्रुप सक्रीय है। गुलामनबी आजाद, कपिल सिब्बल, मनीष तिवाड़ी, आनंद शर्मा, भूपेंद्र सिंह हूडा सरीखे नेता इस ग्रुप के खेवनहार है। ये लोग भी कांग्रेस की वर्तमान कार्यप्रणाली से खुश नहीं है और बदलाव के हामी है। इस गुट ने लेटर बम के जरिये अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर प्रहार किया था और संगठन के नीचे से ऊपर तक चुनाव के प्रबल पक्षधर है। गुलामनबी आजाद के राज्यसभा से निवृत होने के बाद इस गुट ने जम्मू में अपनी बैठक कर हुंकार भरी है। कपिल सिब्बल ने कहा, सच बोलने का मौका है और आज सच ही बोलेंगे। सच्चाई ये है कि कांग्रेस पार्टी कमजोर होती दिखाई दे रही है और इसलिए हम यहां इकट्ठा हुए हैं। कांग्रेस के सभी बागी इस दौरान भगवा पगड़ी में नजर आये।
इसी के साथ कांग्रेस पार्टी के ग्रुप 23 नेताओं का समूह अब देशव्यापी “सेव द आइडिया ऑफ इंडिया” कैंपेन लॉन्च कर रहा हैे। इसके लिए रैलियों और जनसभा का बिगुल जम्मू से बजा दिया है, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने सभी को आमंत्रित किया था। गुलाम नबी आजाद भी कांग्रेस के ग्रुप -23 में शामिल हैं। पिछले साल अगस्त में 23 कांग्रेस नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर सक्रिय नेतृत्व और व्यापक संगठनात्मक बदलाव की मांग की थी।
गौरतलब है 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद कुछ एक राज्यों को छोड़ दें, तो पूरे देश में कांग्रेस अपना जनाधार खोती चली गई। कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व में बदलाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हुई तो राहुल गांधी ने कुछ समय के लिए पार्टी की कमान अपने हाथ में ली, मगर 2019 के लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ दिया। सोनिया गांधी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बन गईं। इसके बाद कई और राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।
इसी बीच चुनावों में कांग्रेस के लगातार खराब प्रदर्शन से पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव की मांग तेज होने लगी। कांग्रेस के शीर्ष 23 नेताओं ने पिछले साल अगस्त के महीने में सोनिया गाँधी को चिट्ठी लिखकर हंगामा खड़ा कर दिया। चिट्ठी लिखने वाले इन्हीं नेताओं को ग्रुप-23 के नाम से कहा गया। ग्रुप-23 कहे जाने वालों में शामिल गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल जैसे नेताओं ने चिट्ठी प्रकरण के बाद भी पार्टी नेतृत्व से चुभते सवाल पूछने बंद नहीं किए। ये नेता लगातार पार्टी आलाकमान के फैसले नाखुश थे।
ग्रुप – 23 के नेताओं द्वारा लिखी गई चिट्ठी को कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व और खासकर गांधी परिवार को चुनौती दिए जाने के तौर पर लिया था। कई नेताओं ने गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल आदि के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी। बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बाद आजाद और सिब्बल ने पार्टी की कार्यशैली की खुलकर आलोचना की थी। उन्होंने व्यापक बदलाव की मांग की थी. इसके बाद वे फिर से कांग्रेस कई नेताओं के निशाने पर आ गए थे।
कांग्रेस आज एक बार फिर सियासत के दो राहे पर खड़ी है। पार्टी ने अपने संगठन को मजबूत नहीं बनाया तो आजादी के गर्भ से निकली पार्टी के खंड खंड होने का खतरा मंडराने लगा है।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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