पूर्वी निगम द्वारा घर -घर जाकर स्थानीय लोगों को कूड़ा प्रबंधन के लिए किया जा रहा है जागरूक

स्वच्छ सर्वेक्षण - 2021

@ chaltefirte.com                                            दिल्ली। स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में बेहतर रैंकिंग प्राप्त करने के लिए पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने कवायद तेज कर दी है। इस दिशा में कार्य करते हुए पूर्वी दिल्ली नगर निगम की टीम और अधिकृत कंपनी की टीम द्वारा शाहदरा दक्षिणी क्षेत्र में वार्ड संख्या 14 ई, लक्ष्मी नगर में घर-घर जाकर घर में कूड़ा प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। टीम से स्थानीय लोगों को स्रोत पर ही कूड़ा पृथकीकरण से संबंधित आई ई सी मटेरियल बांटा और इस संबंध में लोगों को जागरूक किया। इसके अलावा शाहदरा उत्तरी क्षेत्र में वार्ड संख्या 54- ई, सबोली एक्सटेंशन में भी स्थानीय लोगों को कूड़ा प्रबंधन और सूखा कूड़ा – गीला कूड़ा अलग अलग करने के बारे में जागरूक किया गया।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 के मद्देनजर पूर्वी निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा निर्देशों के अनुसार पूर्वी दिल्ली नगर निगम द्वारा अधिकृत कंपनी की टीम विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों से बात कर रही है और और उन्हें समझा रही है कि घर पर बेहतर रूप से कूड़ा प्रबंधन किस प्रकार करें। उन्हें बताया जा रहा है कि सूखे कचरे और गीले कचरे को अलग-अलग रखें और इसी प्रकार अलग किये हुए कचरे को कूड़ा उठाने वाले लोगों को हस्तांतरित करें। इस कार्य में लगाये गए कर्मचारियों को भी ट्रेनिंग दी जा रही है कि वे क्षेत्र से पृथकीकृत किये कूड़ा एकत्रित करें और और यदि किसी घर से सूखा कूड़ा और गीला कूड़ा अलग करके नहीं दिया जा रहा है तो उन्हें कूड़ा प्रबंधन के बारे में जागरूक करें और भविष्य में पृथकीकृत किया कचरा देने के लिए उत्साहित करें। इस कार्य विशेष में लगाये गए कर्मचारियों को यह भी बताया जा रहा है कि पृथकीकृत किये हुए कूड़े को ऑटो टिप्पर में किस प्रकार व्यवस्थित करके रखें।

मुख्य अभियंता प्रदीप कुमार खंडेलवाल ने बताया कि क्षेत्र में जाकर जनता को बताया जा रहा है कि उनको गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखने की आदत डालनी होगी। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट ऐक्ट 2016 के अनुसार कूड़े के उचित निस्तारण के साथ-साथ उसका सेगरिगेशन भी अनिवार्य है। यह लोगों की आदत से जुड़ा मसला है इसलिए इसके बारे में जनता को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में नुक्कड़ नाटक भी करवाये जा रहे हैं जिससे स्थानीय लोगों में व्यवहारात्मक बदलाव लाया जा सके।

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