पश्चिम बंगाल में रक्तरंजित चुनाव की आहट

बाल मुकुन्द ओझा

पश्चिम बंगाल में जल्द ही विधानसभा चुनाव की घोषणा हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 22 फरवरी के बंगाल दौरे के बाद विधानसभा चुनाव की घोषणा हो सकती है। चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक 3 या 4 मार्च को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों के बारे में ऐलान किया जा सकता है। इसी बीच यहाँ सियासी संग्राम के रक्तरंजित होने से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चुनौतीपूर्ण हो गए है। यहाँ बेटी और भूमिपुत्र के नारे गुंजायमान होने लगे है। तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच दावों-प्रतिदावों समेत आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। नेताओं की जबान फिसलने की भी कई घटनाएं हो चुकी हैं।
प बंगाल की चुनावी लड़ाई विधानसभा चुनाव के इतिहास में बहुत अधिक दिलचस्प और रोमांचक होने जा रही है। भाजपा यहाँ शून्य से शिखर पर पहुँचने के लिए अपनी सारी शक्ति झोंक दी है। लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के बाद बीजेपी के हौंसले बुलंद है। चुनाव में बीजेपी ने ममता के गढ़ में बढ़ी सेंध लगाते हुए 18 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। पश्चिम बंगाल की कुल 42 लोकसभा सीटों में से ममता बनर्जी के पार्टी ने 22 सीटों पर और बीजेपी ने 18 सीटों पर जीत हासिल की है। अगर दोनों ही पार्टियों के मिले वोट शेयर को देखे तो टीएमसी को जहां 43.3 प्रतिशत वोट मिले तो बीजेपी ने अपने वोट फीसदी में पिछले चुनाव के मुकाबले लगभग 23 फीसदी का इजाफा करते हुए 40.3 प्रतिशत वोटों पर कब्जा किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात्र 17 फीसदी मत मिले थे।
भाजपा के लिए यह करो या मारो की लड़ाई है। इस चुनाव से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा जुड़ गई है। भाजपा यहाँ त्रिपुरा को दोहराना चाहती है जहाँ भाजपा ने सत्तारूढ़ कांग्रेस को तौड़ कर अपना वर्चस्व कायम कर लिया था। प बंगाल में वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस पिछले दस सालों से सत्तारूढ़ है। तृणमूल नेत्री ममता बनर्जी ने इस राज्य में वामपंथियों के लम्बे शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की थी। भाजपा ममता की पार्टी को नेस्तनाबूद कर सत्ता प्राप्त करना चाहती है और उसने यहाँ अपने सारे संसाधन लगा दिए है। यहाँ तक की सीबीआई जैसे एजेंसियों को भी तृणमूल नेताओं के पीछे लगा दी है।
प बंगाल विधानसभा के त्रिकोणात्मक संघर्ष होने है। यहाँ कांग्रेस और वामपंथियों ने अपना गठजोड़ किया है। दोनों दलों के बीच प्रहार तीखे होते जा रहे हैं। ये तीखे प्रहार कटु नारों और व्यंग्य के रूप में वायरल भी हो रहे हैं। ओवेसी की पार्टी भी बंगाल में अपनी एंट्री का प्रयास कर रही है। इस भांति यहाँ स्पष्ट रूप से त्रिकोणात्मक संघर्ष की सम्भावना अधिक है। त्रिकोणात्मक संघर्ष में भाजपा को लाभ मिलने की बात भी कही जा रही है।
बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष कराना चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती है। यहाँ रक्तरंजित चुनाव से इंकार नहीं किया जा सकता। सत्तारूढ़ तृणमूल पार्टी के अनेक जनाधार वाले नेताओं ने अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा ज्वाइन करली है जिससे चुनाव के दिलचप होने की सम्भावना बलवती हो गयी है। दोनों ही दलों ने बड़ी बड़ी रैलियों का आगाज कर प्रचार शरू कर दिया है। प्रधान मंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा हर माह बंगाल का दौरा कर रहे है। दोनों पार्टियों में रोज ही मारकाट होती है। एक दूसरे पर हमले हो रहे है। बम बाजी आम बात हो गई है। हत्या के आरोप भी लगाए जा रहे है। भाजपा का कहना है उसकी पार्टी के सैंकड़ों नेताओं को मौत के घाट उतारा गया है। दूसरी तरफ राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी बहुत मुख्य होकर बोल रहे है। राज्यपाल खुले आम कह रहे है सरकारी कर्मचारी सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्त्ा की भांति काम कर रहे है। धनखड़ ममता पर भी बहुत खपा है और कानून व्यवस्था ध्वस्त होने का आरोप लगा रह है। उन्होंने केंद्र को भेजी अपनी रिपोर्ट में बंगाल की स्थिति की चर्चा करते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में अपनी शंका व्यक्त की है।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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