वैश्विक समुदाय में बढ़ती भारत की धाक

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

बात चाहे कोविड महामारी की हो या चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र की या शांति रक्षा मिशनों की हो या जलवायु परिवर्तन की या आर्थिक क्षेत्र की हो या आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने की आज दुनिया के देश भारत की और आशा और विश्वास की दृष्टि से देखने लगे हैं। अब वैश्विक मंचों पर भारत को लेकर दुनिया के देशों द्वारा दिए जा रहे संदेशों में प्रमुखता से उजागर होने लगी है। पिछले सप्ताह ही विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन 2021 को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र् की उपमहासचिव अमीनो मोहम्मद ने अपने संबोधन में कहा कि भारत पर वैश्विक समुदाय का भरोसा बढ़ा है। दुनिया के देश भारत की और आशाभरी दृष्टि से देखने लगा है। मोहम्मद ने कहा कि भारत जी 20 में शामिल दुनिया के देशों में इकलोता ऐसा देश है जो राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान के उद्देश्यों को बेहतरीन तरीके से हासिल करेगा।

दरअसल देखा जाए तो अब भारत दुनिया के देशों में महाशक्तियों के पिछलग्गू देशों में ना होकर दुनिया के देशों को नेतृत्व देने की स्थिति में आने लगा है। आज दुनिया के देश कोविड वेक्सिन के लिए भारत की और देख रहे हैं। भारत ने ना केवल छह महीनों में कोविड वेक्सिन सफलता पूर्वक विकसित कर ली अपितु दुनिया के देशों द्वारा इस वेक्सिन को मान्यता भी तेजी से मिली। भारत ने पड़ोसी देशों को करोड़ों की संख्या में जहां निःशुल्क उपलब्ध कराने की पहल की है वहीं ब्राजील आदि देश भारतीय वेक्सिन की जल्दी से जल्दी सप्लाई की मांग कर रहे हैं। देश में भी वेक्सिन का दूसरा चरण आरंभ हो गया है। भारतीय वेक्सिन के साइड इफेक्ट ना के बराबर होने से दुनिया के देशों का इस पर भरोसा बढ़ा है। इससे पहले कोविड के विरुद्ध संघर्ष में अमेरिका सहित दुनिया के देशों में भारतीय दवा की बहुत अधिक मांग देखी गई और स्थिति यहां तक हो गई कि विदेशों में दवा नहीं भेजने के संकल्प के बावजूद देश को निर्णय परिवर्तित करना पड़ा। यह हमारी दवाओं की विश्वसनीयता का ही कारण है। दुनिया के देशों में कोविड वेक्सिन ही नहीं भारत द्वारा तैयार जीवन रक्षक वेक्सिनों का सबसे अधिक विश्वास रहा है यही कारण है कि टेटनेस लेकर अधिकांश बीमारियों के टीकों की सप्लाई भारत कर रहा है।

आज दुनिया के देशों में चीन खलनायक बन कर उभरा है तो पाकिस्तान अलग थलग होने के साथ ही याचक की दृष्टि में आ गया है। अमेरिका में जिस तरह से ट्र्ंप ने जाते जाते लोकतंत्र की हत्या करने के प्रयास किए वह जगजाहिर है तो रुस भी अब पहले वाली स्थिति में नहीं रहा। इंग्लेण्ड अपनी समस्याओं से जूझ रहा है तो फ्रांस आए दिन आंतकवादी गतिविधियों से दो चार हो रहा है। ऐसे में दुनिया के देशों की भारत के प्रति आशाभरी दृष्टि से देखना जायज भी हो जाता र्है और इसका सबसे बड़ा कारण दुनिया के देशों का भरोसा जीतना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन 2021 का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए साफ कर दिया कि इस तरह के वैश्विक सम्मेलन वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए बहुत जरुरी है। नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ ही पृथ्वी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा। भारत पेरिस संबंधी प्रतिवद्धताओं और लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर है। हम 2030 तक 450 गीगावाट अक्षय उर्जा उत्पादन क्षमता स्थापित करने की राह पर बढ़ रहे हैं। 2019 में भारत ने लगभग शतप्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है वहीं सालाना 80 लाख टन कार्बनडाईआक्साइड उत्सर्जन कम किया है। यह शुभ संकेत हैं।

देखा जाए तो अब दुनिया के देशों का भारत के प्रति नजरिया बदला है। अब भारत सांप सपेरों का देश ना होकर दुनिया के देशों को नेतृत्व देने की स्थिति में आ गया है। जल्दी ही हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था होने जा रही है तो समग्र विकास का पहिया तेजी से घूमने लगा है। इज आफ डूइंग में हमनें लंबी छलांग लगाई है। कोरोना के इस दौर में दुनिया के देश निवेश की दृष्टि से भारत की और रुख कर रहे हैं। आई टी के क्षेत्र में भारतीय युवाओं का लोहा माना जा रहा है। यही कारण है लाख प्रयासों के बावजूद भारतीय युवा आज अमेरिका की आईटी कंपनियों के लिए अनिवार्य जरुरत बन गए हैं। अंतरिक्ष में अपने उपग्रहों को स्थापित कराने में भारतीय सेटेलाइट यान की सहायता ली जा रही है। आज भारत मेडिकल पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है तो कोविड को छोड दिया जाए तो विदेशी पर्यटकों की पहली पंसद भारत बनता जा रहा है। चीन जैसी महाशक्ति को चुनौती देने में भारत सक्षम हुआ है। यह चुनौती चाहे सीमा पर हो या अन्य क्षेत्रों में। चीनी एपों पर रोक लगाकर सीधे सीधे चीन को चुनौती दी जा चुकी है। यह सब समग्र प्रयासों का परिणाम है।

दुनिया के देशों के विश्वास और भरोसे को बनाए रखने के लिए भारत को और अधिक सतर्कता और दूरदष्टि से आगे बढ़ना होगा। देश की जिस तरह की छवि बनती जा रही है इस छवि का सकारात्मक उपयोग करते हुए भारतीय उत्पादों को, सेवा क्षेत्र को दुनिया के नक्शें पर आगे बढ़ाना है ताकि इस भरोसे का अधिक से अधिक लाभ लिया जा सके।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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