शिक्षा को मिलेगा बूस्टर डोज

डॉ मोनिका ओझा खत्री

कोरोना महामारी ने शिक्षा क्षेत्र को सबसे बड़ी क्षति पहुंचाई है। जिससे यह क्षेत्र अब तक उबर नहीं पाया है। स्कूल कॉलेज अभी तक पूरी तरह नहीं खुले है। छात्र अध्यापक और अभिभावक परेशान है। ऐसे में इस बजट से शिक्षा क्षेत्र को बड़ी उम्मीदे थी जो आंशिक रूप से ही पूरी हुई है। उच्च और तकनीकि क्षेत्र को कोई खास लाभ नहीं पहुंचा है। इससे उच्च शिक्षा में निराशा का भाव है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को वर्ष 2021 -22 के सालाना बजट में एजुकेशन सेक्टर में कई बड़ी घोषणाएं की हैं। चूंकि कोरोना महामारी ने शिक्षा क्षेत्र को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया है और स्कूलों को अपने अस्तित्व को बनाए रखने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। इसे देखते हुए शिक्षा क्षेत्र में सुधारों की बेहद जरूरत बताई जा रही थी। वित्त मंत्री ने देश को 100 नए सैनिक स्कूलों की सौगात दी गई है। ये स्कूल निजी स्कूलों और गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पर खोले जाएंगे। नई शिक्षा नीति की जरूरतों के अनुसार देशभर में 15 हजार स्कूलों को सुदृढ़ बनाया जाएगा। उनकी गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। लेह में नया केंद्रीय विश्वविद्यालय खोले जाने की घोषणा की गई है।
देश में शोध को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान की स्थापना की जाएगी। इसके लिए 50 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा उच्च शिक्षा आयोग के गठन के लिए प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। पहली बार राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन की घोषणा की गई है। सीतारमण ने बताया कि इसका काम होगा सरकारी दस्तावेजों को प्रमुख भारतीय भाषाओं में अनुवाद कर पब्लिक प्लेटफॉर्म पर लाना। आदिवासी क्षेत्रों में 750 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की स्थापना की जाएगी। इसके लिए बजट राशि 20 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 38 करोड़ रुपये तक कर दी गई है। वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में आदिवासी छात्रों के लिए स्कूलों को 48 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
एससी स्टूडेंट्स के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम जारी रहेगी। इसके लिए वित्तीय मदद बढ़ाई जा रही है। अगले 6 साल के लिए 35,219 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जिससे देश के करीब 4 करोड़ एससी स्टूडेंट्स को 10वीं के बाद शिक्षा जारी रखने में मदद दी जाएगी। साल 2016 में नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम लॉन्च हुई थी। अब सरकार अप्रेंटिसशिप एक्ट में संशोधन कर रही है। पढ़ाई पूरी करने के बाद स्टूडेंट्स, इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन व डिप्लमो करने वालों को अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग ( दी जाएगी। इसके लिए करीब 3 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। देश के वर्कफोर्स को वैश्विक स्तर पर स्किल्ड बनाने के लिए जापान के साथ इंटर ट्रेनिंग प्रोग्राम की जानकारी दी गई है। वित्त मंत्री ने कहा है कि इसे अन्य कई देशों के साथ भी शुरू किया जाएगा। यूएई के साथ ऐसी एक ट्रेनिंग पार्टनरशिप पर काम चल रहा है।

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