“सालाना बजट” अच्छे दिनों को लगाया पलीता

बाल मुकुन्द ओझा

अच्छे दिनों की बाट जोह रहे लोगों को अगले साल के बजट से निराशा होगी। लगता है अच्छे दिनों की उनकी इंतजारी और बढ़ जाएगी। महंगाई के रौद्र रूप का भी सामना करना पड़ेगा। कोरोना और अर्थव्यवस्था की दोहरी चुनौतियों के बीच मोदी सरकार ने सोमवार को अपने पांच साला कार्यकाल के दूसरे बजट का आगाज कर दिया है। यह इस दशक का पहला डिजिटल बजट है। यह बजट ऐसे समय आया है जब अर्थव्यवस्था कोरोना के कहर से उबर रही है। बजट घोषणाओं को देखने से लगता है यह आम आदमी की आशाओं के अनुरूप नहीं है। बजट पर गिरती अर्थव्यवस्था की छाया को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को लोकसभा में पेश किये अपने वर्ष 2021 – 2022 के सालाना बजट में दो हाथों को रोजगार देने की मोदी सरकार ने कोई घोषणा नहीं की। पेट्रोलियम पदार्थों में भी कोई राहत नहीं दी गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि बजट ऐसे समय आ रहा है जब देश की जीडीपी दो बार माइनस में गई। कोरोना के वार से उबर रही अर्थव्यवस्था के बीच सरकार ने इस बजट में इकॉनमी को पुश करने पर जोर रखा है। इस बार हेल्थ सेक्टर और इंफ्रा पर खासा जोर दिया गया है। बजट में सरकार ने हेल्थ सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खासा जोर दिया है। हेल्थ सेक्टर के बजट को 94,000 करोड़ से बढ़ाकर 2.38 लाख करोड़ कर दिया गया है। बजट में कोरोनावायरस के खिलाफ टीकाकरण के लिए 35,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया है, वहीं रोड और हाइवेज को लेकर भी कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। यह बजट ऐसे समय पेश हुआ है, जब देश कोविड-19 संकट से बाहर निकल रहा है। बजट में आम आदमी के राहत की कोई घोषणा नहीं की गई है। इससे महंगाई बढ़ेगी। विपक्ष ने इसे निराशाजनक बजट बताया है।
वित्त मंत्री ने अपने एक घंटा पचास मिनट के भाषण में कहा 2021-22 का बजट 6 स्तंभों पर टिका है। पहला स्तंभ है स्वास्थ्य और कल्याण, दूसरा-भौतिक और वित्तीय पूंजी और अवसंरचना, तीसरा-अकांक्षी भारत के लिए समावेशी विकास, मानव पूंजी में नवजीवन का संचार करना, 5वां-नवाचार और अनुसंधान और विकास, 6वां स्तंभ-न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन। उन्होंने कहा सरकार के आठ संकल्प हैं. 1. किसानों की आय दोगुनी करना, 2. मजबूत बुनियादी ढाँचा, 3. स्वस्थ भारत, 4. बेहतर सुशासन, 5. युवाओं के लिए अवसर, 6. सभी के लिए शिक्षा, 7. महिला सशक्तिकरण और 8. समावेशी विकास।
वित्त मंत्री ने कहा- सरकार ने सबसे संवेदनशील वर्गों को सहारा देने के लिए, पीएमजीकेवाई, तीन आत्मनिर्भर पैकेज और बाद में की गईं घोषणाएं अपने आप में पांच मिनी बजट के समान थीं। आत्मनिर्भर पैकेजों ने ढांचागत सुधारों की हमारी गति को बढ़ाया है।
बजट सैलेरीड क्लास को निराश कर गया। इस बजट में न तो कोई अतिरिक्त टैक्स छूट की घोषणा की गई और न ही टैक्स स्लैब में कोई सुधार किया गया। इस बजट में सिर्फ वैसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक राहत की घोषणा हुई, जो कि 75 साल से ज्यादा उम्र के होंगे। इनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से छूट मिली। टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तीन साल पुराने टैक्स के मामले नहीं खुलेंगे।स्टार्टअप के लिए कैपिटल गैन टैक्स में छूट एक साल बढ़ाई। पीएफ देर से जमा करने पर किसी तरह की कटौती नहीं होगी। जीएसटी प्रक्रिया और आसान बनाने पर बजट में बताया गया है लोहे और स्टील के उत्पाद और सोना चांदी के सामान सस्ते होंगे। देश और विदेश में बनने वाले मोबइल और चार्जर महंगे होंगे, क्योंकि इनपर कस्टम ड्यूटी 2.5 फीसदी बढ़ गई है। बिजली, इंश्योरेंस, स्टील प्रोडक्ट, सोना, चांदी, पेंट, लोहा, जूता, नायलोन का सामान, ड्राई क्लीनिंग, चमड़े के उत्पाद, पॉलिस्टर कपड़ा, रत्न आदि भी सस्ते होंगे। मगर मोबाइल, मोबाइल चार्जर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सूती कपड़ा, ऑटो पॉर्टस आदि महंगे होंगे। विपक्ष इसे कॉर्पोरेट जगत के बजट की संज्ञा दे रहा है। बजट के अनुसार एयर इंडिया को बेचेगी सरकार। भारत पेट्रोलियम में विनिवेश होगा। आईडीबीआई बैंक का भी निजीकरण होगा। सरकारी कंपनियों की जमीन भी बेची जाएगी। शेयर बाजार में एलआईसी की लिस्टिंग होगी। किसानों के हित के लिए सरकार प्रतिबद्ध, एमएसपी से डेढ़ गुना ज्यादा पर होगी खरीदारी।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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