चरैवेति-चरैवेति…हैप्पीनेस का मंत्र

सुरेश जैन

निश्चित रूप से आज ही के दिन जब हम 71वां गणतंत्र दिवस मना रहे थे तो सोचा भी नहीं था, अगला भारतीय गणतंत्र दिवस आते-आते क्या- क्या परेशानियां दुनिया को… देश को… शहर को… अपने घर को उठानी पड़ेगी, लेकिन यह भी एक इम्तिहान था। दुनिया का… देश का…। अब हम सब हिंदुस्तानी खुश हैं। 130 करोड़ की आबादी वाले इस देश ने कोरोना की लड़ाई में सारी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है। सच्चाई यह है, गांव- देहात में मेडिकल फैसिलिटी की…डॉक्टर्स की कमी है। मगर हमारे जज्बे, आत्मीय शक्ति, इम्यूनिटी पॉवर ने हमें हारने नहीं दिया। मैं हमेशा कहता रहा हूं… कोविड हारेगा,मानव जीतेगा…। हमें हिंदुस्तान पर गर्व करना चाहिए। दुनिया टकटकी लगाए देख रही है, इस पिछड़े मुल्क ने क्या कमाल कर दिया। दुनिया के अग्रणीय देश जब वैक्सीन बनाने की बात कर रहे थे तो भारत साइंटिस्टों ने एक नहीं… दो- दो वैक्सीन भारत को दे दी है। भारत के इस यश में टीएमयू कोविड-19 हॉस्पिटल की भी ख़ास भूमिका है। आप सब जानते हैं, टीएमयू हॉस्पिटल एवम् रिसर्च सेंटर को कोविड-19 लेवल 3 अस्पताल का भी दर्जा मिला हुआ है। कोरोना वारियर्स अब तक हजारों-हजार कोविड रोगियों के चेहरे पर मुस्कान लौटा चुके हैं। डॉक्टरों के इस संकल्प, समर्पण और जन सेवा के बूते सूबे के 58 प्राइवेट और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हमारा हॉस्पिटल अव्वल रहा है। प्लाज्मा थेरेपी में भी इस हॉस्पिटल को उत्तर प्रदेश में दूसरा स्थान मिल चुका है। यूपी के यशस्वी मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ इन उपलब्धियों के लिए मुझे और मेरे पुत्र एवम् जीवीसी  मनीष जैन को साधुवाद दे चुके हैं। हम जब तक गौरवान्वित महसूस नहीं करेंगे और कमियां ढूंढते रहेंगे, मुल्क आगे नहीं बढ़ेगा। गौरव से कहना पड़ेगा, हम हिंदुस्तानी हैं। सबसे आगे हैं और सबसे आगे रहेंगे। 1000 साल की गुलामी के बाद हमारे अंदर बहुत सारी कमियां हैं। मगर हम सधे कदमों के साथ आगे बढ़ रहे हैं…  इस बेमिसाल रफ्तार से हम रिकॉग्नाइज्ड हुए हैं । हमारा गणतंत्र भी उतना ही मजबूत हुआ है। यह बहुत बड़ी बात है। यह गर्व की बात है। यह भारत के संविधान का कमाल है, चाय बेचने वाले  नरेंद्र मोदी एक दिन पीएम बन जाते हैं। गंगा नदी को तैरकर पार करके पढ़ने जाने वाले लाल बहादुर शास्त्री भी प्रधानमंत्री बन जाते हैं। मुझे स्मरण आता है, फर्स्ट टाइम बहन  मायावती यूपी की सीएम बनीं तो तत्कालीन पीएम  पीवी नरसिम्हा राव विलायत के दौरे पर थे…विदेशी पत्रकारों ने पूछा… भारत के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की बागडोर एक दलित की बेटी ने संभाल ली है…आप कैसे देखते हैं…बिना समय गंवाए राव बोले, दिस इज द मिरेकल ऑफ़ इंडियन डेमोक्रेसी…। यह हिंदुस्तानी गणतंत्र की ताकत है। सच में हमारा संविधान दुनिया का सर्वश्रेष्ठ विधान है।

कुछ लोग कहते हैं, जब मंजिल मिलेगी, तब चैन से बैठेंगे, लेकिन मैं कहता हूं, मंजिल जब मिले तब मिले मगर जब तक सफर का भी मजा लीजिए। आप स्टुडेंट्स हैं तो एन्जॉय   कीजिए। आप एंप्लोई हैं, उसको एन्जॉय कीजिए। आप घर जाएं उसको एन्जॉय कीजिए। फ़ख़्र कीजिए, अपनी शख्सियत पर। फ़ख़्र कीजिए, अपने मां – बाप पर। फ़ख़्र कीजिए, अपने मुल्क पर। मंजिल तो आपके पैरों को छुएगी, बस आप के सफर में जान होनी चाहिए। कभी घमंड मत कीजिए। कभी – कभी हम जमीनी हकीकत भूल जाते हैं। कहते हैं ना… जो पहुँच चुके हैं मंजिल पर…. उनको तो नहीं कुछ नाज़ ए सफर… दो कदम अभी जो चले नहीं… रफ़्तार की बातें करते हैं…। रफ़्तार को मत देखिए सिर्फ मंजिल को देखिए। मंजिल आपको निश्चित मिलेगी। गोल तय कभी मत करो। जहां तक पहुंच गए, वही मंजिल है। जहां तक जाएंगे, वही मंजिल होगी। अगर मंजिल तय करोगे तो वही रुक जाओगे।

चरैवेति-चरैवेति… यही तो भारत का मंत्र है। नहीं रुकना है… नहीं थकना है… सतत चलना है…सतत चलना है। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी को यूपी के तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक के आतिथ्य-सत्कार का सुअवसर मिला। वह 24 मार्च,2018 को यूनिवर्सिटी के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आए। हजारों-हजार छात्र-छात्राओं को दिया उनका सारगर्भित सम्बोधन याद आ रहा है। श्री नाईक ने अपने आशीर्वचन में छात्र-छात्राओं से कहा था, सूर्य के समान बनिए। सूर्य सुबह से शाम तक चलता रहता है। प्रकाश, प्रेरणा और चेतना देता है, जो उसे जगत वंदनीय बनाता है। अगर सूर्य के समान बनना है तो चलते रहिए। मुख्य अतिथि ने विद्यार्धियों को ताकीद किया, अगर आप बैठे हैं, खड़े हैं, लेटे हैं, सोते हैं तो आपका जीवन भी उसी अवस्था में होगा। अगर आप चलते हैं तो आपका जीवन भी चलेगा। इसीलिए जीवन में चरैवेति-चरैवेति को आत्मसात करना चाहिए। वह जीवन में सफलता का मंत्र देना भी नहीं भूले। वह बोले, हमेशा मुस्कुराइए, सभी को प्रोत्साहित करते रहिए, किसी का अपमान न करें और हमेशा और अधिक अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में शॉर्टकट धोखे के मानिंद है। शॉर्टकट की डगर से जिंदगी में कभी भी सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती है। टेक्नोलॉजी का बदलता दौर है, हमें खुद को और बेहतर बनाने की ओर अग्रसर होना है।

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी को भी कभी नहीं रुकना है कि देश में इसका क्या स्थान है। सफर को एन्जॉय करना है। कहां 2008 में थे, 2001 से उसे याद कीजिए। जो पहले बैच के छात्र आते हैं , वे बहुत खुश होते हैं। धूल उड़ता हुआ विश्वविद्यालय… पेड़ का नाम नहीं…। जब वे आज डस्टप्रूफ सड़के और हरियाली से आच्छादित देखते हैं तो उन्हें बहुत खुशी होती है। कल आप कहां होंगे, आप उसकी कल्पना नहीं कर सकते। देश की आजादी के समय स्वतंत्रता सेनानियों ने भी कल्पना भी नहीं की होगी। आज सबको पता है। हम कहां खड़े हैं। कोई भी मुल्क ऐसा नहीं है, जो सोच सके कि बिना इंडिया के वह चलेगा। सबको यहां के डॉक्टर, इंजीनियर और कारीगर चाहिएं। अपने देश पर फ़ख़्र कीजिए। ऐसे सैकड़ों गणतंत्र दिवस आपकी जिंदगी में आएंगे। सोचिएगा, हर वर्ष आने वाले गणतंत्र दिवस पर देश और ऊंचाइयां कैसे छुए। भारत की ईमानदार छवि, मेहनत, अनुशासन, समर्पण,संकल्प, राष्ट्र प्रेम जगजाहिर है। दुनिया का ताकतवर मुल्क -अमेरिका अमूमन हर क्षेत्र हिंदुस्तान को सर्वोच्च प्राथमिकता देता पसंद करता है, क्योंकि हम जहनी तौर पर अमन और तरक्की पसंद लोग हैं। जी-7 में शामिल होने का अमेरिकी न्योता इसका पुख्ता सुबूत है। अमेरिका के बाद ब्रिटेन के पीएम श्री बोरिस जॉनसन ने भी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को जी-7 समिट में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। यह सम्मेलन जून में ब्रिटेन के कॉर्नवॉल में होना है। जी-7 समूह में दुनिया की प्रमुख सात आर्थिक शक्तियां- ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, अमेरिका- और यूरोपीय संघ शामिल है। यह समूह कोरोना वायरस महामारी, जलवायु परिवर्तन और मुक्त व्यापार जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेगा। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया है। इन तीनों देशों को समिट के लिए बतौर मेहमान बुलाया आया है।

(लेखक तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति हैं )

 

 

 

 

 

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