थाली पोषण से कितनी खाली !

बाल मुकुन्द ओझा

दुनिया के लगभग पांच करोड़ बच्चों के मुकाबले भारत 2.55 करोड़ वेस्टेड यानि गंभीर रूप से कमजोर बच्चों का घर है। इतना ही नहीं यहां 50 फीसदी से अधिक महिला आबादी एनीमिया से भी पीड़ित है। इस कारण कम वजन वाले बच्चों का जन्म यहां आम बात है। पोषण का मतलब केवल आहार लेने भर से नहीं है, बल्कि शरीर को लवण,विटामिन आदि जैसे आवश्यक पोषक तत्व भीउपलब्ध कराना है।
जर्मनी के वैज्ञानिकों ने लोगों की खानपान की आदतों के आधार पर एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी से दुनिया को अवगत कराया है। पॉटस्डैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया है, वर्तमान में लोगों का खानपान जैसा है अगर आगे भी ऐसा ही रहा तो अगले 30 सालों में इनमें पोषक तत्वों की भारी कमी होगी। 2050 तक दुनिया की आधी आबादी ओवरवेट हो जाएगी। इसकी वजह होगी अनहेल्दी फूड यानी ऐसा खाना जिनसे पोषक तत्व नहीं मिलते और शरीर को नुकसान पहुंचता है। इतना ही नहीं ऐसे खानपान के कारण दुनियाभर के 150 करोड़ लोग मोटापे से जूझ रहे होंगे। 30 साल बाद 50 करोड़ लोगों का वजन औसत से भी कम होगा। ये भूख और तंगहाली से लड़ रहे होंगे। रिसर्च रिपोर्ट में चेताया गया है की हमने अपने आहार में पोषक तत्वों को शामिल नहीं किया तो अनेक बीमारियों का शिकार होने से कोई नहीं बचा पायेगा। विशेषकर प्रोसेस्ड फूड के बेहताशा उपयोग से मोटापा बढ़ता जायेगा जो ज्यादातर बीमारियों की नींव है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, जॉइंट पेन और कैंसर तक की वजह चर्बी है।
पौष्टिक आहार को लेकर दुनियां में व्यापक हलचल मची है। आहार मनुष्य की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण आधारभूत आवश्यकता है जिसके बिना कोई भी प्राणी जीवन की कल्पना नहीं कर सकता है। दुनिया में प्रचुर खाद्यान्न उत्पादन होने के बावजूद लोगों के लिए स्वास्थ्यपरक आहार आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हमारे शरीर को पूरी तरह स्वस्थ रहने के लिए पोषक पदार्थों की जरूरत होती है। ये पोषक पदार्थ अलग-अलग तरह के भोजन से हमें मिलते हैं, यानि ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां, सूखे मेवे, डेयरी उत्पाद और मीट वगैरह आदि। शारीरिक श्रम करना, सोना और आराम करने की तरह ही संतुलित और पौष्टिक आहार लेना भी जरूरी है। भोजन का मतलब यह नहीं होता कि आप कुछ भी खा रहे हैं। ऐसा भोजन करें जो स्वच्छ और पोषण तत्वों से भरपूर हो । इससे न सिर्फ हम बीमारियों से दूर रहते हैं, बल्कि शारीरिक विकास भी अच्छी तरह होता है। संतुलित आहार के अनेक फायदे नहीं है जैसे आप के शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और अच्छी नींद को बढ़ावा भी देता ह। संतुलित आहार शरीर में वसा कम करता है साथ ही शरीर को अच्छे से काम करने के लिए प्रेरित करता है। शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण के कारण बच्चों व महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे वह आसानी से कई तरह की बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। कुपोषण की जानकारी होना जरूरी है। कुपोषण प्राय पर्याप्त संतुलित आहार के अभाव में होता है। बच्चों और स्त्रियों के अधिकांश रोगों की जड़ में कुपोषण ही होता है।
आहार हमारे जीवन की प्राथमिक आवश्यकता है। इससे हमें ऊर्जा मिलती है। जब तक आहार में पौष्टिक तत्व नहीं होंगे तब तक शरीर का विकास उचित प्रकार से नहीं होता है। आहार में पौष्टिक तत्व होने आवश्यक है जो शरीर का वर्द्धन करें। हमारे देश में गरीबी एवं अज्ञानता के कारण भोजन में पौषक तत्वों की कमी रहती है। इन्ही कारणों से बच्चों में कुपोषण एवं वयस्कों में कई विकार उत्पन्न होते है। आहार में कार्बोज, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण एवं विटामिन विद्यमान हो तभी व्यक्ति की शारीरिक वृद्धि एवं विकास होगा। इस प्रकार के आहार में जल एवं फाइबर की भी पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए। वैज्ञानिकों के अनुसार रोजाना 30 मिनट की वॉक, सीढ़ी चढ़ना, रात का खाना हल्का लेना और घर के कामों को करके भी मोटापा आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। नाश्ते में अंकुरित अनाज यानी मूंग, चना और सोयाबीन को अंकुरित खाएं। ऐसा करने से उनमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। मौसमी हरी सब्जियों को डाइट में शामिल करें। अधिक फैट वाला दूध, बटर तथा पनीर लेने से बचें। जंक फूड से बचना होगा और पोषक आहार अपनाना होगा तभी मोटापे जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

Post add

Leave A Reply

Your email address will not be published.