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महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन पर कांग्रेस ने कहा, राज्यपाल ने जल्दबाजी दिखाई


मुंबई। कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने महाराष्ट्र में सरकार गठन के सभी विकल्प अपनाए बिना राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करके जल्दबाजी दिखाई। वहीं, सोमवार को राज्य में गैर-भाजपा सरकार बनाने की कोशिशों में नाकाम रही शिवसेना ने कहा कि अगर राष्ट्रपति शासन लगता है, तो उसे चुनौती दी जा सकती है। इससे पहले राज्यपाल ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को सरकार गठन को लेकर मंगलवार रात साढ़े आठ बजे तक का समय दिया था। हालांकि इससे पहले ही उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने से जुड़ी रिपोर्ट भेज दी। 
कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने यहां पत्रकारों से कहा,  मैं इस कार्रवाई की निंदा करता हूं, जो सभी विकल्प अपनाएबिनाजल्दबाजी में की गई। यह राज्यपाल की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या राज्यपाल दबाव में काम कर रहे हैं। कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता विजय वदेत्तीवार ने कहा राष्ट्रपति शासन सरकार गठन की राह में रोड़ा नहीं बनेगा। उन्होंने कहा,  जब तीनों दलों (कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना) ने यह दर्शा दिया था कि उनके पास 144 से अधिक विधायकों का समर्थन है तो राज्यपाल को हमें सरकार गठन का न्योता देना चाहिये था।
कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी इस तरह के विचार साझा करते हुए कहा,  एक बार हमारे पास समर्थन के पत्र आ जाएं, तो राष्ट्रपति शासन हटा दिया जा सकता है। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि राज्यपाल को हमारी पार्टी को सरकार बनाने की  इच्छा और क्षमता  दिखाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए था। हालांकि शिवसेना के विधान पार्षद अनिल परब नेकहा कि अगर राष्ट्रपति शासन लगाया गया तो उसे चुनौती दी जा सकती है।

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