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राम मंदिर : अदालत का फैसला सबको स्वीकार करना होगा: शाह


राम मंदिर पर शीर्ष अदालत का फैसला सबको स्वीकार करना होगा। उच्चतम न्यायालय किसी के चाहने से नहीं चलता। यह अपने तरीके से काम करता है। बुधवार को रांची में आयोजित 'हिन्दुस्तान पूर्वोदय' कार्यक्रम में गृहमंत्री अमित शाह ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर निर्णय शायद पहले ही आ जाता, लेकिन कपिल सिब्बल और कांग्रेस ने अदालत में कहा था कि लोकसभा चुनाव से पहले इस पर फैसला नहीं आना चाहिए। अब चुनाव भी निपट गए हैं और सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई भी चल रही है। ऐसे में राम मंदिर पर निर्णय भी आ ही जाएगा। 
शाह ने कहा कि मंदिर हमें नहीं बनाना है। उच्चतम न्यायालय का फैसला आएगा, तब यह तय हो जाएगा। मंदिर बनाने के लिए जिस ट्रस्ट के पास जगह जाएगी या फिर उच्चतम न्यायालय का जो भी आदेश होगा, उसी हिसाब से कार्रवाई होगी।
देश भर में लागू होगा एनआरसी
गृहमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) देशभर में लागू होगा। एनआरसी से बाहर लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत बाहर किया जाएगा। एनआरसी केवल 'रजिस्टर ऑफ असम' नहीं है। प्रत्येक देश के पास नागरिकों की सूची होनी चाहिए। गृहमंत्री ने कहा कि असम में एनआरसी से बाहर रह गए लोगों के लिए ट्रिब्यूनल के सामने पक्ष रखने का मौका है। वहां की सरकार ने व्यवस्था दी है कि बाहर रह गए लोगों को वकील की सुविधा मिले। उन लोगों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जा रहा है। शाह ने कहा कि दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है, जहां कोई भी जाकर बस सकता है तो भारत में कैसे बसाऐंगे? 
भारतीय भाषाओं को मजबूत करने की जरूरत
गृहमंत्री ने हिंदी पर जारी विवाद पर कहा कि वह खुद गैर हिंदी-भाषी प्रदेश से आते हैं। उनके भाषण को गलत तरीके से समझा गया। शाह ने कहा कि भारतीय भाषाओं को मजबूत करना चाहिए। बच्चा तभी अच्छा पढ़ सकता है, जब वो अपनी मातृभाषा में पढ़ेगा। मातृभाषा का मतलब हिंदी नहीं, राज्य की भाषा है। उन्होंने कहा, देश में एक ऐसी व्यस्था होनी चाहिए कि अगर आप कोई दूसरी भाषा सीखते हो तो वो हिंदी हो। गृहमंत्री ने कहा कि स्थानीय भाषाओं को मजबूत करने के लिए कभी न कभी आंदोलन करना पड़ेगा, नहीं तो हम ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की तरह हो जाएंगे, जिन्हें नहीं पता कि उनकी भाषा कौन-सी है।

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