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कश्मीर पर ट्रंप का चौथी बार मध्यस्थता का प्रस्ताव, भारत ने दिया ये जवाब


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौथी बार कश्मीर मामले पर मध्यस्थता की पेशकश की है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकों में कश्मीर मामले पर चर्चा की और मध्यस्थता के जरिए दोनों परमाणु सशस्त्र देशों की मदद का प्रस्ताव रखा। 
ट्रंप ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनकी संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर भारत और पाकिस्तान के नेताओं के साथ फलदायी बातचीत हुई। उन्होंने मध्यस्थता की पेशकश करते हुए कहा कि पाकिस्तान और भारत की बात की जाए, तो हमने कश्मीर पर चर्चा की। मैंने प्रस्ताव रखा कि मैं मध्यस्थता समेत हर वह मदद करने के लिए तैयार हूं, जो मैं कर सकता हूं। उन्होंने कहा कि वह हरसंभव कोशिश करेंगे क्योंकि उनके बीच गंभीर तनाव है और उम्मीद है कि स्थिति बेहतर होगी।
ट्रंप ने कहा कि दो भद्र पुरुष जो इन दो देशों का नेतृत्व कर रहे हैं, वे मेरे मित्र हैं। मैंने कहा कि वे इसका समाधान निकालें। वे परमाणु सशस्त्र देश हैं, उन्हें समाधान निकालना ही होगा। इस बयान से एक दिन पहले ट्रंप ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी जहां दोनों नेताओं ने पाकिस्तान से पैदा हो रहे आतंकवाद के खतरे और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार संबंधी मामलों पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया था। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामला है और किसी तीसरे पक्ष की इसमें कोई भूमिका नहीं है। गौरतलब है कि पहली बार 22 जुलाई को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश की।
ट्रम्प की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री पहले ही यह बता चुके हैं। विदेश सचिव ने भी मंगलवार को यही बात की। 
विदेश सचिव विजय गोखले ने मोदी-ट्रंप की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा था कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि हम पाकिस्तान के साथ वार्ता करने से संकोच नहीं कर रहे हैं पर ऐसा होने के लिए हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान कुछ ठोस कदम उठाए, लेकिन हमें पाकिस्तान की तरफ से ऐसी कोई कोशिश नहीं दिख रही। 

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