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अब बेटियां जमकर खेलेंगी फुटबॉल


भारतीय खेल प्राधिकरण पूरे देश में लड़कियों को फुटबॉल खिलाने का अभियान चलाने जा रही है। ‘बेटी बचाओ, बेटी खिलाओ' नारे के साथ अब पूरे देश के कस्बों और शहरों में बेटियां फुटबॉल खेलेंगी। प्राधिकरण यह काम अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के साथ मिलकर करेगा। ये सारी कवायद अगले साल नवंबर में होने वाले लड़कियों के अंडर-17 विश्व कप फुटबॉल को देखते हुए की जा रही है।
गर्ल्स लीग : इस अभियान को ‘खेलो इंडिया फुटबॉल गर्ल्स लीग' नाम दिया गया है। यह देश के अलग-अलग कस्बों व शहरों में होगी। हर जगह साल में करीब 30 से 40 मैच कराने का लक्ष्य रखा गया है।
हर शहर में 16 टीमें : हर शहर में कम से कम 16 टीमें तैयार की जाएंगी और फिर इनके बीच मुकाबले होंगे। हर टीम एक-दूसरे से करीब चार-पांच माह में 15 मैच खेलेगी। यह दो स्तर पर होगा। पहले राउंड में पूरे देश में स्थानीय क्लब, अकादमी और स्कूलों की टीमों के बीच मुकाबले होंगे। दूसरे यानी फाइनल राउंड में किसी एक स्थान पर मुकाबले खेले जाएंगे। इसमें हर राउंड की रैंक-वन टीम क्वालिफाई करेगी।
साई भी मदद करेगा : इस लीग के आयोजन के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण तकनीकी और आर्थिक मदद करेगा। यही नहीं, इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रायोजकों को भी शामिल किया जा सकता है। राज्यों में खेल विकास का काम देख रहे विभाग, स्थानीय प्राधिकरण, नगरपालिकाएं व स्थानीय संगठन अपने-अपने स्तर पर बेटियों की इस लीग के आयोजन में मदद करेंगे।
ट्रेनिंग भी दी जाएगी : खिलाड़ियों को जमीनी स्तर पर ट्रेनिंग दी जाएगी। किसी टीम का अपना मैदान होगा तो साई वहां सुविधाएं मुहैया कराएगा।
निगरानी भी होगी 
लीग ठीक तरीके से संचालित हो, इसके लिए राज्य स्तर पर एक निगरानी समिति बनाई जाएगी। इसकी अध्यक्षता राज्य के खेल सचिव करेंगे। इसमें राज्य फुटबॉल संघ का अध्यक्ष या उसके द्वारा नामित एक प्रतिनिधि और भारतीय खेल प्राधिकरण का प्रतिनिधि प्रमुख रूप से शामिल होंगे। इनके अधीन स्थानीय स्तर पर एक निगरानी समिति भी बनाई जाएगी।
पढ़ाई में दिक्कत नहीं 
भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के महानिदेशक संदीप प्रधान की ओर से जारी एक पत्र में कहा गया है कि इस लीग से बेटियों की पढ़ाई का कोई भी नुकसान नहीं होगा। लीग के मुकाबले शनिवार और रविवार को होंगे। साथ ही अगर इन दिनों के अलावा बीच में छुट्टियां पड़ती हैं तो उनमें भी मुकाबले कराए जा सकते हैं।

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