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नीतीश को चांदी के सिक्कों से तौलने वाले ‘छोटे सरकार’ के अपराधों की अनंत कथा का चैप्टर क्लोज


साल 2007 में बिहार के विकास का बीड़ा उठाए सुशासन बाबू नीतीश कुमार के बुलावे पर उद्योगपति मुकेश अंबानी पटना आ रहे थे। फ्रेजर रोड इलाके के एक रेस्तरां में सत्ताधारी दल के एक विधायक ने अपने चेले से पूछा 'ई मुकेशवा आ रहले है, एकरा त बड़ी पइसा हय। एकरा किडनैप करके नुका देवय त केतना रुप्पा मिलतै, अन्दाजा हौ?’ बेशक बात मजाक की ही रही होगी। फिर भी ऐसा साहसी मजाक खुलेआम किसी विधायक को करते हुए कभी देखा नहीं गया है। लेकिन जब बात मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की हो तो कुछ भी संभव है। करीब डेढ़ सौ आपराधिक मुकदमे और शायद ही कोई ऐसा जुर्म जिसे करने का आरोप इस सफेदपोश बाहुबली पर न लगे हो। अपराध के दागदार चोले के ऊपर खादी का लिबास ओढ़ने वाले अनंत सिंह को लगा था कि सत्ता की सरपरस्ती में उनका साम्राज्य बरकरार रहेगा। लेकिन अब शायद उसी सत्ता की बेरुखी से अनंत के अपराधों का चैप्टर क्लोज़ होने वाला है। अनंत सिंह अब किसी भी समय गिरफ्तार हो सकते हैं। उन पर आर्म्स एक्ट, गैरकानूनी गतिविधि (निरोधक) अधिनियम (यूएपीए) और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। अनंत सिंह के पैतृक आवास से छापेमारी के दौरान एक एके-47 राइफल के साथ ही बड़ी मात्रा में गोलियां और विस्फोटक सामग्री बरामद हुईं हैं। जबकि, इस घटना पर अनंत सिंह का कहना है कि मुंगेर के मौजूदा जेडीयू सांसद ललन सिंह के इशारे पर उन्हें फंसाया गया है और अब कोर्ट से ही उन्हें न्याय का आसरा है। लेकिन एक बदनाम गुंडा नेताओं की नेतागिरी चमकाते-चमकाते खुद कैसे नेता बन जाता है। पावर हाथ में आता है तो कानून को लात मारने लगता है। जुर्म के डिक्शनरी में जितने जुर्म हैं वो सब करता है। पुलिस वालों से डरता नहीं बल्कि उन्हें धमकाने से भी बाज नहीं आता है। 

आंखों पर काला चश्मा, हाथों में एके47, 47 छूटे तो फिर उन्हीं हाथों में घोड़े की लगाम और लगाम छूटे तो जुबान पर बस अपना ही नाम। बाहुबली विधायक अनंत सिंह जिन्हें छोटे सरकार के नाम से भी जाना जाता रहा है। इसे बिहार की बदकिस्मती ही कहेंगे कि जिस बिहार को अपराधमुक्त बनाने का सपना दिखाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सूबे की गद्दी का मालिक बने। उसी बिहार में छोटे सरकार होने का ख़िताब प्रदेश में सबसे बदतरीन मुज़रिम को हासिल हुआ। बिहार को करीब से जानने वाले पत्रकार बताते हैं कि नीतीश कुमार और अनंत सिंह के बीच दोस्ती के बीज साल 2004 लोकसभा चुनाव के दौरान पड़े थे, जब नीतीश बाढ़ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। नीतीश कुमार को इस बात का अंदाजा हो गया था कि मोकामा से निर्दलीय विधायक सूरजभान सिंह के लोजपा में शामिल होने के बाद उनका अनंत सिंह की मदद के बिना चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। इसलिए नीतीश के खासमखास राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह अनंत सिंह को जदयू में लेकर आए। बाढ़ संसदीय क्षेत्र में उस समय एक जनसभा के दौरान चांदी के सिक्कों से अनंत सिंह ने नीतीश कुमार को तौला था। अनंत सिंह के आतंक का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक बार बिहार का मुख्यमंत्री रहते हुए जीतनराम मांझी को धमकी दे डाली थी। यह धमकी उन्‍होंने तब दी थी जब मांझी ने नीतीश कुमार के खिलाफ बगावत की थी। बताया जाता है कि इससे पहले अनंत सिंह ने नीतीश सरकार में मंत्री रहीं परवीन अमानुल्लाह को भी धमकी दी थी। 
लेकिन 2015 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अनंत सिंह बागी हो गए। अनंत सिंह ने मोकामा सीट से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा और जेल में रहते हुए मौजूदा सरकार के मंत्री और उस समय के जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार को हरा दिया। अनंत सिंह को राजनीति में लेकर आने वाले ललन सिंह से उनकी दोस्ती की खाई तब और भी ज्यादा गहरी हो गई, जब 2019 लोकसभा चुनाव में अनंत ने ललन के खिलाफ अपनी पत्नी नीलम सिंह को मुंगेर से चुनाव में उतारा। हालांकि चुनाव ललन सिंह ने ही जीता। लेकिन अनंत सिंह पिछले कुछ महीनों से लगातार आरोप लगा रहे हैं कि ललन सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया था, इसलिए उनके घर में छापेमारी की जा रही है। उन्हें परेशान किया जा रहा है। वैसे तो अनंत सिंह पर हत्या, अपहरण, फिरौती और डकैती के न जाने कितने मामले दर्ज हैं और ऐसा पहली बार नहीं है कि अनंत सिंह गिरफ्तार होंगे। लेकिन मोदी सरकार द्वारा इस बार के सत्र में लाए गए गैरकानूनी गतिविधि (निरोधक) अधिनियम (यूएपीए) के तहत अनंत सिंह पर दर्ज मुकदमे के बाद अनंत कथा पर विराम लगने की पूरी संभावना है। जो कायदे से बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था।

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