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कैबिनेट का फैसला: शराब में मिलावट पर दुकान का लाइसेंस रद्द होगा


जहरीली शराब से लगातार हो रही मौतों के बाद राज्य सरकार अब जागी है। उसने कड़े तेवर अपनाए हैं। ऐसी दुखद घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कैबिनेट ने फैसला किया है कि शराब में अब किसी भी प्रकार की मिलावट की गई तो अब गैंगेस्टर और रासुका की कार्रवाई के साथ-साथ सीधे शराब दुकान का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। मिलावटी शराब से किसी की मौत होने पर धारा 304 सहित कई धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसके लिए कैबिनेट ने आबकारी नीति 2019-20 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने आबकारी नीति में और भी कई बदलावों को मंजूरी दी है। सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा व प्रमुख सचिव आबकारी एवं गन्ना, चीनी उद्योग संजय भूसरेड्डी ने बताया कि पहले शराब में किसी भी प्रकार की मिलावट पर पहली बार अपराध करने पर 40 हजार रुपये, दूसरी बार अपराध करने पर 50 हजार रुपये और तीसरी बार अपराध करने पर शराब दुकान का लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान था। अब मिलावट का अपराध करने पर सीधे दुकान का लाइसेंस निरस्त होगा। यह नियम थोक और फुटकर सभी तरह की दुकानों के लिए है। ऐसा करने वालों पर रासुका और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिससे लंबे समय तक वे जेल में रहें। साथ ही मिलावटी शराब से मौत होने पर आरोपियों के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का केस (धारा 304) के तहत चलाया जाएगा।
ज्यादा रेट पर शराब बेचने पर दंड बढ़ा 
कैबिनेट ने एमआरपी (न्यूनतम निर्धारित मूल्य) से ज्यादा रेट पर शराब बेचने पर पहली बार पकड़े जाने पर जुर्माना 10 हजार को बढ़ाकर 75 हजार रुपये और दूसरी बार पकड़े जाने पर 20 हजार से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दिया है। तीसरी बार पकड़े जाने पर केवल 30 हजार रुपये जुर्माना था लेकिन अब तीसरी बार पकड़े जाने पर जुर्माना न लगाकर सीधे दुकान का लाइसेंस रद्द किया जाएगा।
1. छोटी दुकान के लिए गृहकर का डेढ़ गुना कर ही लगेगा
उत्तर प्रदेश सरकार ने छोटे दुकानदारों पर बड़ी मेहरबानी की है। अब घरों में 120 वर्ग फीट तक की दुकान चलाने वालों से गृहकर का मात्र डेढ़ गुना कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला हुआ। क्या लोग 120 वर्ग फीट के मकान में दुकान खोल सकेंगे? इस सवाल पर प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने कहा कि यह काम प्राधिकरण के नियमों के दायरे में आता है। कैबिनेट की बैठक में नगर निगम (संपत्ति कर) नियमावली 2000 में संशोधन करते हुए उत्तर प्रदेश नगर निगम (संपत्ति कर) (तृतीय संशोधन) नियमावली 2019 को मंजूरी दी गई। इससे आवासीय क्षेत्रों में घरों में चाय, दूध, ब्रेड, अंडा, पान, धोबी या लांड्री, फल, सब्जियों, फोटो स्टेट, नाई, हेयर ड्रेसर और दर्जी की दुकान चलाने वालों को फायदा मिलेगा। इन्हें अभी तक तय गृहकर का पांच गुना कर देना पड़ा रहा था। प्रदेश सरकार ने मॉडल के तौर पर लखनऊ के इंदिरानगर का सर्वे कराया था। राज्य सरकार के इस फैसले का फायदा केवल शहरी क्षेत्र के लोगों को मिलेगा।
2. गाजियाबाद नगर निगम 150 करोड़ के बांड जारी करेगा
उत्तर प्रदेश सरकार ने अहमदाबाद नगर निगम की तर्ज पर बुनियादी सुविधाओं के लिए लखनऊ नगर निगम को 200 करोड़ और गाजियाबाद नगर निगम को 150 करोड़ रुपये का बांड जारी करने की अनुमति दे दी है। दोनों नगर निगम सेबी की गाइडलाइन के आधार पर एक माह में बांड जारी करेंगे। राज्य सरकार इस बांड पर कोई गारंटी नहीं देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला हुआ। प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने कैबिनेट फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नगर निगम 10 साल के लिए बांड जारी करेंगे। इस पर साढ़े आठ से नौ प्रतिशत तक ब्याज दिया जाएगा। लखनऊ नगर निगम को बांड से मिलने वाले पैसे से जलापूर्ति और सीवरेज का काम कराया जाएगा। गाजियाबाद में सीवरेज के साथ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। ट्रीटमेंट के बाद पानी उद्योगों को दिया जाएगा और इससे होने वाली आय का फायदा बांड लेने वालों को ब्याज के रूप में दिया जाएगा।
3. पी के राज्य चिह्न के दुरुपयोग पर दो साल की सजा
उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य चिह्न (लोगो) का दुरुपयोग करना अब लोगों को महंगा पड़ेगा। राज्य चिह्न का दुरुपयोग अब दंडनीय अपराध होगा और इसके साबित होने पर दो साल का कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए कैबिनेट ने सोमवार को संबंधित विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। विधेयक इसी मानसून सत्र में विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) में पेश किया जाएगा। खास बात यह है कि अभी राज्य चिह्न के दुरुपयोग पर किसी तरह के जुर्माने या सजा का प्रावधान नहीं था। इसके लिए नया कानून बनाया जा रहा है। प्रस्तावित कानून से संबंधित विधेयक का नाम यूपी का राज्य संप्रतीक (अनुचित प्रयोग प्रतिषेध) विधेयक-2019 होगा। विशेष बात यह है कि राज्यपाल राम नाईक ने इसके दुरुपयोग का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। उन्होंने पत्र में कहा था कि उनके पास कई ऐसे पत्र आते हैं, जिन पर राज्य चिह्न छपा होता है, जबकि वे इसके उपयोग के लिए अधिकृत नही हैं। यह अपराध है।
4. लोक सेवा अधिकरण के 13 पदों पर चयन जल्द
लोक सेवा अधिकरण में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष समेत सदस्यों के 13 पद खाली हैं। इन पदों पर नये सिरे से चयन होगा। सोमवार को  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मानकों में बदलाव को मंजूरी दी गई। लोक सेवा अधिकरण (संशोधन) अधिनियम 2017 के माध्यम से लोक सेवा अधिकरण 1976 की धारा 3 में संशोधन किया गया। संशोधन के मुताबिक अधिकरण में अध्यक्ष 65 वर्ष की आयु के बाद पद धारण नहीं करेंगे। वहीं उपाध्यक्ष या अन्य सदस्यों के मामले में यह आयु सीमा 62 वर्ष की गई है। लोक सेवा अधिकरण (संशोधन) अधिनियम 2017 को निरस्त किये जाने के संबंध में हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ में कई याचिकाएं दायर की गईं लेकिन इनमें सुनवाई के दौरान और न ही विधायी अनुभाग ने इस संशोधन को निरस्त या स्थगित नहीं किया।
5. निजी विश्वविद्यालयों विधेयक के मसौदे को मंजूरी
यूपी कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालयों पर शिकंजा कसने वाले विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इसे जल्द ही विधानमंडल के मानसून सत्र में पेश करके पास कराया जाएगा। कैबिनेट ने विधेयक को विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश करने, विचार करने और पास कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। यह जानकारी उच्च पदस्थ सूत्रों ने दी। खास बात यह है कि कैबिनेट ने पहले इससे संबंधित अध्यादेश को मंजूरी दी थी। लेकिन जिस कैबिनेट में इस अध्यादेश को मंजूरी दी गई थी, उसी कैबिनेट में विधानमंडल का सत्र बुलाने का फैसला किया गया था। इसलिए राज्यपाल राम नाईक ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत की। बातचीत के बाद सहमति बनी कि इसका अध्यादेश के बजाए विधेयक लाया जाए। इस विधेयक के पास होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह एक ऐसा कानून बन जाएगा जिसके जरिए यूपी के सभी निजी विश्वविद्यालय एक ही कानून के अधीन होंगे। साथ ही भविष्य में भी नए निजी विश्वविद्यालय इसके जरिए ही खोले जाएंगे।

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