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जयशंकर के एजेंडे पर चीन कूटनीति सबसे ऊपर


विदेश मंत्री एस जयशंकर के एजेंडा पर चीन कूटनीति सबसे ऊपर है। उन्होंने इसका स्पष्ट संकेत दिया है। विदेश मंत्री बनने के बाद चीनी प्रतिनिधिमंडल से पहली मुलाकात में ही जयशंकर ने भारत-चीन व्यापार घाटा कम करने का सवाल जोर शोर से उठाया था। पाकिस्तान को छोड़कर जिन देशों में चीन का दखल ज्यादा है वहां संतुलन की नीति को लेकर भी बृहद एजेंडे पर मंत्रालय काम कर रहा है। जयशंकर पहल से चीन के साथ व्यापार संतुलन का मुद्दा जोर शोर से उठाते रहे हैं। विदेश सचिव के रूप में भी उन्होंने हर फोरम पर चीन के साथ चर्चा में इस मुद्दे को उठाया था। 
वादा पर अमल करे चीन
सूत्रों के मुताबिक चीन लगातार व्यापार घाटा कम करने को लेकर वादा तो करता है लेकिन उसपर अमल नहीं करता। बल्कि चीन की ओर से भ्रमित करने वाले आंकड़े पेश किए जाते हैं। इसलिए सबसे बड़ी चुनौती इस बात की है कि चीन अपने वादे पर अमल करके भारत के साथ नाजुक व्यापार घाटा कम करने के लिए कदम उठाए।
अपने लिए मौके तलाश रहा भारत
सूत्रों ने कहा कि चीन के साथ व्यापार से जुड़े सीधे मुद्दे के अलावा भारत अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध की स्थितियों में भी अपने लिए अवसर देख रहा है। भारत की कोशिश है कि वह व्यापार के मोर्चे पर अमेरिका और चीन दोनों को साधकर अपने हितों की रक्षा कर सके। विदेश मंत्री जयशंकर लगातार व्यापार से जुड़े मुद्दों पर वित्त व वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के संपर्क में हैं। भारत में निवेश बढ़ाने की चुनौती पर भी फ्रेमवर्क पर काम शुरू हो गया है।
व्यापार घाटे की चुनौती
सूत्रों ने कहा कि भारत और चीन के बीच व्यापार संतुलन सबसे बड़ा मुद्दा है। क्योंकि इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। वर्ष 2016 में भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा लगभग 47.68 अरब अमेरिकी डॉलर था। चीन भारत में अपना निर्यात तो बढ़ा रहा है लेकिन उसका निवेश तुलनात्मक रूप से बहुत कम है। उसका ज्यादा ध्यान अपने उत्पादों को भारत में बेचने पर है। चीन कई बार अपने निर्यात को ही निवेश बताकर व्यापार घाटे पर भारत के तर्क को खारिज करने का प्रयास करता रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन से वास्तविकता पर आधारित व्यपारिक संबंधों की पैरवी की है।
चीन का दखल कम करने पर भी जोर
भारत अपने पड़ोस में चीनी वर्चस्व को लेकर भी संजीदा है। विदेश मंत्री की भूटान यात्रा भी अनायास नहीं है। भारत अपने अरसे पुराने दोस्त से संबंधों की मजूबती के साथ चीन को इस तरफ अपना दखल बढ़ाने से रोकने पर ध्यान दे रहा है। चीन ने डोकाला विवाद के बाद से भूटान के सीमावर्ती इलाकों में अपना आधारभूत ढांचा बेहतर किया हे। श्रीलंका और मालदीव में भी भारत ने संतुलन की नीति पर काम किया है। विदेश मंत्री भारत के लिए इन सभी देशों में अवसर बढ़ाने के पक्ष में हैं।

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