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दिल्ली समेत 22 शहरों की हवा खराब, देश का मैदानी हिस्सा है सबसे प्रदूषित


गंगा-यमुना का मैदानी हिस्सा देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित (Polluted) है। यहां पर रहने वाले लोग सामान्य से ढाई गुना ज्यादा प्रदूषण (Pollution) झेल रहे हैं। विज्ञान एवं पर्यावरण केन्द्र (सीएसई) ने देश के पांच अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति का आकलन करके यह निष्कर्ष निकाला है। गंगा-यमुना के मैदानों में दिल्ली समेत 22 ऐसे शहर बसे हुए हैं, जिनकी आबादी दस लाख से ज्यादा है।
गंगा-यमुना का मैदान (इंडो-गैंजेटिक प्लेन) अब प्रदूषण का गढ़ बनता जा रहा है। सीएसई ने पर्यावरण दिवस (5 जून) के मौके पर पूरे देश में प्रदूषण की स्थिति पर एट द क्रासरोड नाम से रिपोर्ट जारी की है। इसमें देश के पांच भौगोलिक हिस्सों में साल 2007 से लेकर 2017 तक की प्रदूषण की स्थिति का विश्लेषण किया गया है।
दावा है कि गंगा-यमुना के इस पूरे हिस्से में प्रदूषक कण पीएम-10 की मात्रा सामान्य से ढाई गुना तक ज्यादा है। पीएम-10 की साल भर में औसत मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होनी चाहिए। जबकि, यहां पर वर्ष 2017 में पीएम-10 की औसत मात्रा 162 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। यह सामान्य से 2.7 गुना ज्यादा है।
इन शहरों को शामिल किया
रिपोर्ट में गंगा-यमुना के भौगोलिक क्षेत्र में दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, लखनऊ, बुलंदशहर, आगरा, अमृतसर, लुधियाना, अंबाला, फरीदाबाद, गुरुग्राम, जींद, करनाल, लोनी देहात, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, सोनीपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बागपत और पटना को शामिल किया गया है। इन शहरों में देश की एक बड़ी आबादी रहती है।
दक्षिण की हवा सबसे साफ सुथरी
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के पांच भौगोलिक हिस्सों में दक्षिणी हिस्से की हवा तुलनात्मक रूप से सबसे ज्यादा साफ-सुथरी है। यहां पर प्रदूषक कणों की मात्रा सबसे कम पाई गई है।
उत्तरी हिस्सा
इसमें भोपाल, जोधपुर, कोटा, राजकोट, सूरत और बड़ोदरा जैसे शहरों को शामिल किया है। यहां पर वर्ष 2017 में पीएम-10 का वार्षिक स्तर 120 रहा। .
समुद्रतटीय 
इसमें चेन्नई, कोलकाता, मुंबई, थाने, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम जैसे शहरों को शामिल किया गया है। यहां पर वर्ष 2017 में पीएम 10 का वार्षिक स्तर 114 दर्ज किया गया।
दक्षिणी 
इसमें कोयंबटूर, हैदराबाद और *मदुराई जैसे शहरों को रखा गया है। यहां पर पीएम-10 का वार्षिक औसत 75 रहा।
मध्य 
इसमें बेंगलुरु, जबलपुर और पुणे जैसे शहरों को रखा गया है। यहां पर पीएम 10 का वार्षिक औसत 88 रहा है। इसके अनुसार देखा जाए तो देश के ज्यादातर हिस्से की हवा में पीएम-10 की मात्रा निर्धारित से ज्यादा है। 

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