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देश में प्रदूषण रहित इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के सञ्चालन की संभावनाएं

देश में प्रदूषण रहित इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के निर्माण और सञ्चालन की असीम संभावनाएं है। इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी को विश्व स्तर पर परिवहन क्षेत्र में गेम चेन्जर माना जाता है। यह प्रदूषण रहित, सस्ती ईंधन लागत,. कम मेंटिनेंस व्यय, ऊर्जा कुशल तथा सुरक्षित होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से व्यवहार्य है। इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग पेट्रोल या डीजल वाहनों को हटा कर नए अवसरों की तलाश में हैं। ऑटो इंडस्ट्री में इलेक्ट्रिक क्रांति अगली बड़ी चीज है। ई-वाहन स्टार्ट होने का यह सबसे अच्छा समय है। वास्तव में भारत में वाहन विद्युतीकरण के लिए बहुत अधिक गुंजाइश है क्योंकि आपको पता होना चाहिए कि हाल ही में परिवहन मंत्रालय ने भारत स्टेज -5 को छोड़ने और सीधे भारत स्टेज 6 पर 2020 तक बदलने का फैसला किया है। ये  वाहन बिजली से चार्ज होकर चलेंगे। इन वाहनों की विशेषता है कि यह प्रदूषण रहित हैं तथा इन वाहनों को चार्ज करने के लिए कोई चािर्जग स्टेशन की आवश्यकता नहीं है। बिजली के 15 एमपीयर सोकट के साथ इसे चार्ज किया जा सकता है। इन वाहनों की सीटिंग कैपेस्टी सात प्लस एक सीटर है। यह वाहन एक बार चार्ज होने के बाद 100 किलोमीटर की दूरी तय कर सकते हैं तथा पूरा चार्ज होने के लिए बिजली की 15 यूनिट ही खर्च करते हैं। इन वाहनों का 90 फीसद केंद्र तथा 10 फीसद धन राज्य सरकार वहन करेगी।
पारंपरिक आईसी इंजन संचालित वाहनों की बीएस -6 को उत्सर्जन मानदंडों को पूरा करने के लिए अपनी सीमाएं होंगी तो वाहनों को हाइब्रिड या पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बनाने के लिए एक महान व्यापार का अवसर देखा जा रहा है।प्रदूषण हर साल बढ़ रहा है, ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी के लिए बड़ा डर है, यह हमारे लिए बहुत हानिकारक है। आज दुनिया में सबसे अधिक प्रदूषण वाले 14 शहर भारत के हैं। ईंधन की बढ़ती कीमतों, जीवाश्म ईंधन की कमी और कार्बन डाइऑक्साइड प्रदूषण के संयोजन दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौतियां पेश करते हैं। भारत कोई अपवाद नहीं है। भारत, दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा ऑटो बाजार एक परिवर्तन के लिए तैयार है।  2030 तक पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहा है। यह देश में नवीकरणीय ऊर्जा क्रांति में मदद करने के लिए सरकार के दृष्टिकोण का हिस्सा है। यह स्पष्ट रूप से प्रशासन, निजी क्षेत्र और आम जनता के एकजुट प्रयासों की आवश्यकता होगी।
यही कारण है कि अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक वाहन कंपनियां बढ़ रही हैं और भविष्य में उनके लिए अवसरों की तलाश कर रही हैं। अब चिंता यह है कि हमारी सरकार कैसे प्रदूषण मुक्त भविष्य बनाने के लिए कदम उठाती है।
अशोक लीलैंड, टेस्ला मोटर्स, महिंद्रा, ओला और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां पहले से ही इस पर काम कर रही हैं और उनका लक्ष्य 2025-2030 तक सभी इलेक्ट्रिक कारों को रोड पर उतारने का है। लेकिन लोगों के लिए बड़ी चिंता यह है कि उनका इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कोई बुनियादी ढांचा नहीं है, वे कैसे चार्ज कर सकते हैं और वे अपने वाहन को कहां चार्ज करते हैं। सरकार को बुनियादी ढांचे, चार्जिंग स्टेशनों को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि परिदृश्य नियंत्रण में आए।


हर्ष शर्मा 
33/4 ब्लॉक डी बांगुर एवेन्यू 
कोलकत्ता 


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