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जस्टिस गोगोई मामला: सुप्रीम कोर्ट का सवाल सुनवाई की जल्दी क्यों


सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर उन्हें क्लीनचिट तो दे दी, लेकिन उन्हें फंसाने के आरोपों पर सुनवाई की बात कही है। याचिकाकर्ता के जल्द सुनवाई की मांग पर अदालत ने कहा कि इसमें जल्दी क्या है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जस्टिस गोगोई को यौन उत्पीड़न के मामले में कथित रूप से फंसाने की साजिश को लेकर सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने वाली याचिका पर उचित समय पर सुनवाई होगी।
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जस्टिस एसए बोबडे और एस अब्दुल नजीर की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने इसे 8 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। पीठ ने शर्मा से पूछा, इसमें जल्दी क्या है। आपने इसे दायर किया है।
देखेंगे कि किसके सामने सूचीबद्ध होगी : शर्मा ने कहा कि उनकी याचिका उसी पीठ समक्ष सूचीबद्ध कर दी जाए जिसने मुख्य न्यायाधीश को फंसाने की साजिश का दावा करते हुए हलफनामा दायर करने वाले अधिवक्ता के मामले की सुनवाई की थी। जस्टिस बोबडे ने कहा, हमें नहीं मालूम। यह सामान्य प्रक्रिया में सूचीबद्ध होगी। हम देखेंगे कि यह कब सूचीबद्ध होगी। आपका आग्रह कितना उचित क्यों नहीं हो, हम नहीं कह सकते कि मामला किसी पीठ विशेष समक्ष सूचीबद्ध जाएगा।
जस्टिस पटनायक को नियुक्त किया था : अधिवक्ता उत्सव सिंह बैंस के हलफनामों पर सुनवाई के बाद अदालत ने जस्टिस गोगोई को फंसाने की साजिश, सुप्रीम कोर्ट में बेंच फिक्सिंग के आरोपों की जांच को 25 अप्रैल को पूर्व जज एके पटनायक को नियुक्त किया था।
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शर्मा ने याचिका में कई वकीलों को प्रतिवादी बनाया है। आरोप लगाया है कि इनमें से कुछ अधिवक्ताओं की कार्रवाई तो न्यायालय की अवमानना के समान है। मुख्य न्यायाधीश को बदनाम करने, उन्हें व शीर्ष अदालत के अन्य जज को नियंत्रित करने की सुनियोजित साजिश है। याचिका में सीबीआई से जांच कराने व गैर सरकारी संगठनों पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।

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