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सरकार बनाने की दावेदारी: चुनाव नतीजे से पहले ही विपक्षी खेमे ने शुरू की सत्ता की कसरत



नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के मतदान से पहले ही विपक्षी खेमे ने नई सरकार बनाने की संभावनाओं को लेकर सियासी कसरत शुरू कर दी है। आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत विपक्षी खेमे के कई नेताओं से मुलाकात कर चुनाव बाद सभी विपक्षी पार्टियों का साझा मोर्चा बना सरकार बनाने की पहल करने पर चर्चा की। बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव से नायडू की प्रस्तावित मुलाकात चुनाव बाद विपक्षी गोलबंदी की पहल के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
भाजपा-एनडीए की विगत में दिखाई गई राजनीतिक तेजी को लेकर सतर्क विपक्षी पार्टियां चुनाव नतीजे आने से पहले ही संभावनाओं के सभी विकल्प पर विचार मंथन कर लेना चाहती हैं। ताकि नतीजों के हिसाब से सियासी रणनीति तय करने में ज्यादा वक्त न लगे। इसीलिए चंद्रबाबू ने शनिवार को सुबह ही राहुल गांधी से सरकार बनाने के विकल्पों से लेकर नेतृत्व जैसे जटिल मसलों पर कांग्रेस का रुख जाना। कांग्रेस ने शुक्रवार को ही साफ कर दिया था कि वह सभी विपक्षी दलों के साथ मिलकर साझा एक साझा प्रगतिशील गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने को तैयार है।
कांग्रेस के रुख से साफ है कि पार्टी ने सरकार के नेतृत्व पर अपना दावा छोड़ा नहीं है। हालांकि भाजपा को रोकने के लिए सभी विपक्षी दलों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जता कांग्रेस ने इस पर लचीला रवैया अपनाने की गुंजाइश होने का संदेश भी दिया।
नायडू ने राहुल से सभी विपक्षी पार्टियों का एक संयुक्त फ्रंट बनाकर सरकार बनाने की पहल करने समेत तमाम विकल्पों पर मंत्रणा की। नायडू की पहल पर कांग्रेस का सकारात्मक रुख एक तरह से फेडरल फ्रंट के बहाने विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव की कोशिशों को पंक्चर करने का दांव भी माना जा रहा है।
केसीआर चुनाव नतीजों के बाद क्षेत्रीय दलों के फेडरल फ्रंट की कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने के हिमायती हैं। केसीआर इस दांव के सहारे जाहिर तौर पर भाजपा को रोकने के नाम पर कांग्रेस को तीसरे मोर्चे जैसी सरकार का समर्थन करने को बाध्य करना चाहते हैं।
केसीआर के दांव को थामने की इसी कोशिश में चंद्रबाबू ने एनसीपी नेता शरद पवार से विपक्ष की वैकल्पिक सरकार की संभावनाओं को लेकर चर्चा की। पवार विपक्षी खेमे के उन नेताओं में शामिल हैं जिनकी चुनाव बाद विपक्षी एकजुटता की पहल में अहम भूमिका मानी जा रही है।
नायडु ने राहुल और पवार के अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भाकपा नेताओं सुधाकर रेड्डी व डी राजा से भी मुलाकात की। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी से टीडीपी नेता ने शुक्रवार को ही मुलाकात की थी। वामपंथी नेताओं से नायडु की चर्चा इस बात के इर्द-गिर्द रही कि भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी दलों की व्यापक एकजुटता में ममता बनर्जी की भी अहम भूमिका होगी। ऐसे में उन दोनों का आपसी राजनीतिक विरोध आड़े न आए। माया और अखिलेश से मिलने चंद्रबाबू लखनऊ पहुंच गए हैं।
चुनाव नतीजों का आकलन-अनुमान लगा रही कांग्रेस ने भी अपनी तरफ से पर्दे के पीछे विपक्षी एकजुटता की संभावनाओं पर बातचीत शुरू कर दी है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनाव परिणाम के आकलन के साथ आगे की पार्टी की सियासी रणनीति पर चर्चा के लिए 22 मई को पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है।राहुल ने कांग्रेस महासचिवों के साथ इस बैठक में सभी राज्यों के प्रभारियों को भी बुलाया है। चुनाव परिणाम 23 मई को आएंगे और ऐसे में पार्टी पदाधिकारियों के साथ राहुल की इस बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
खासतौर पर यह देखते हुए कि क्षेत्रीय दल चुनाव नतीजों के हिसाब से तीसरा मोर्चा बना कांग्रेस पर एक गैर भाजपा सरकार को समर्थन देने की रणनीति बनाते दिख रहे हैं। जबकि कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया था कि चुनाव में उनकी पार्टी सबसे बड़े दल के रुप में उभर रही है और स्वाभाविक रुप से सरकार का नेतृत्व करने को तैयार है। कांग्रेस के इस बयान पर अभी विपक्षी खेमे के किसी दल ने प्रतिक्रिया नहीं दी है। 

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