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लोकसभा चुनाव: एयर स्ट्राइक से ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को फायदे की उम्मीद


हिन्दी राज्यों में जहां भाजपा को अपना पिछला प्रदर्शन बरकरार रखने का दबाव है, उनमें राजस्थान भी एक है। राजस्थान में पिछली बार उसने सभी 25 सीटें पार्टी ने जीती थी और पार्टी को स्पष्ट बहुमत दिलाने में इन सीटों की विशेष भूमिका रही थी। लेकिन विधानसभा चुनाव हारने के बाद इस लोकसभा चुनाव में पार्टी वहां ज्यादा से ज्यादा सीटें लाने के लिए जूझ रही है।
राजस्थान में भाजपा को उम्मीद है कि वहां राष्ट्रवाद का मुद्दा, एयर स्ट्राइक एवं सर्जिकल स्ट्राइक आदि से फायदा होगा। कारण यह है कि राज्य में बड़ी तादात में सैनिकों, पूर्व सैनिकों की संख्या है। दूसरी तरफ कांग्रेस को कर्जमाफी और बेरोजगार नौजवानों के लिए भत्ते आदि की ताजा घोषणाओं से पासा पलटने की उम्मीद है। कांग्रेस का यह भी मानना है कि राज्य में वसुंधरा राजे के खिलाफ असंतोष कायम है। लोकसभा चुनावों में राज्य के मुद्दे ज्यादा हावी हैं तथा राष्ट्रवाद की कोई हवा नहीं दिख रही है।
सैनिकों का संख्या अधिक
भाजपा ने इन चुनावों में पुलवामा हमले के बाद हुई एयर स्ट्राइक को चुनावी मुद्दा बनाया है। इसके साथ ही पूर्व में पाक अधिकृत कश्मीर में की गई सर्जिकल स्ट्राइक को भी भुनाया है। राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहां काफी तादात में नौजवान सेना एवं सुरक्षा बलों में हैं। वहां भूतपूर्व सैनिकों की संख्या भी काफी है। कारगिल की लड़ाई में सबसे ज्यादा शहीद राजस्थान के हुए थे। राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 15 फीसदी तक आबादी सुरक्षा सेवाओं से जुड़ी है। जिसमें सेना, पुलिस, अर्ध सैनिक बलों में कार्यरत लोग, इन बलों के सेवानिवृत्त, उनके परिजन और रिश्तेदार शामिल हैं।
मोदी फैक्टर काम करेगा
भाजपा से जुड़े सूत्र मानते हैं कि परंपरागत मुद्दों के साथ-साथ राजस्थान में खासकर ग्रामीण राजस्थान में उन्हें इन मुद्दों से फायदा हो रहा है। दूसरे, पार्टी को यह भी उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव को लेकर लोगों का नजरिया अलग-अलग है। राजस्थान में मोदी के नेतृत्व का फैक्टर भी काम कर सकता है। इसलिए कांग्रेस की हालिया मजबूती पर राष्ट्रवाद का मुद्दा भारी पड़ सकता है।
दूसरे राज्यों पर भी असर पड़ेगा
सेना से जुड़े मुद्दों का असर राजस्थान के अलावा पंजाब, हिमाचल प्रदेश में भी हो सकता है। वहां भी पूर्व सैनिकों एवं वर्तमान सैनिकों की संख्या काफी है। उत्तराखंड में भी यही स्थिति है। वहां मतदान हो चुका है और यह माना जा रहा है कि वहां भी इसका असर पड़ा होगा।

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