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दिल्ली में सरकारी जमीन पर बने निजी स्कूल नहीं बढ़ा सकेंगे फीस : हाईकोर्ट


दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूल फीस बढ़ोतरी के मामले में उन लाखों लोगों को राहत दे दी है जिनके बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। हाईकोर्ट ने अभिभावकों व सरकार को राहत देते हुए सरकारी जमीन पर बने निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने अपने एकल पीठ के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसके तहत निजी स्कलों को 7वें वेतन आयोग के सिफारिशों के तहत शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन व भत्ता देने के लिए फीस बढ़ाने की अनुमति दे दी थी।
जस्टिस एस. मुरलीधर और आई.एस. मेहता की बैंच ने दिल्ली सरकार की ओर से अधिवक्ता संतोष त्रिपाठी द्वारा दाखिल अपील पर यह अंतरिम आदेश दिया है। बैंच ने कहा है कि सरकारी जमीन पर बना कोई भी निजी स्कूल अगले आदेश तक फीस नहीं बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि एकल पीठ के 15 मार्च, 2019 के फैसले पर फिलहाल रोक लगाई जाती है। सरकार की ओर से अधिवक्ता त्रिपाठी ने बैंच को बताया कि एकल पीठ ने न सिर्फ हाईकोर्ट बल्कि सुप्रीम कोर्ट के 2004 के फैसले की गलत व्याख्या करके निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की अनुमति दे दी है। उन्होंने पीठ से एकल पीठ के आदेश और निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने पर रोक लगाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने 15 मार्च, 2019 को सरकार के उस सर्कुलर को रद्द कर दिया था कि जिसके तहत निजी स्कूलों को 15 फीसदी तक फीस बढ़ाने की अनुमति दिए जाने के अपने आदेश को वापस ले लिया था। एकल पीठ ने कहा था कि सरकारी जमीन पर बने निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए सरकार से पूर्व मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। इसके खिलाफ अपील में सरकार ने कहा है कि ‘हम सिर्फ सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दो जजों के फैसले का पालन कर रहे हैं।’ साथ ही कहा है कि यदि पिछली सरकारों ने नियमों के तहत कार्रवाई नहीं की तो इस आधार पर मौजूदा सरकार को कार्रवाई करने से नहीं रोका जा सकता। 

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