Header Ads

भाजपा बहुमत पाएगी पर सरकार एनडीए की : राजनाथ सिंह


गृह मंत्री राजनाथ सिंह का मानना है कि आगामी 23 मई को आने वाला चुनाव परिणाम दीवार पर लिखी एक ऐसी इबारत है, जिसे आसानी से पढ़ा जा सकता है। वह दावा करते हैं कि देश की जनता ने मन बना लिया है कि नरेंद्र मोदी ही दोबारा प्रधानमंत्री बनें और भाजपा अधिक मजबूत बहुमत के साथ सत्तारूढ़ हो।
गृह मंत्री की हैसियत से पांच वर्ष सफलतापूर्वक गुजारे। ऐसे कौन से तीन काम हैं,                                              जो आपको बहुत संतोष देते हैं?
एक तो नक्सलवाद से प्रभावित देश के कर्ई जिले थे। 126 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। 35-40 ऐसे थे, जो नक्सलवाद से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। अब वहां नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और आठ-नौ जिलों तक ही सिमटकर रह गया है। बाकी पूर्वोत्तर में भी हम लोगों को उग्रवाद के मामले में बहुत कामयाबी हासिल हुई है। 1997 से लेकर आज तक उग्रवाद पर नियंत्रण की सबसे बेहतर स्थिति यदि रही है, तो पिछले दो-तीन वर्षों में रही है। तीसरा काम कहें तो विकास कार्यों में बाधाएं खड़ी वाले 20 हजार संगठनों को मिलने वाली विदेशी मदद को हमने निरस्त किया है।
आपके तीन ऐसे काम, जो आपको लगता है कि शेष रह गए? 
हमारी कोशिश थी कि नक्सलवाद की समस्या देश से पूरी तरह समाप्त हो जाए। उग्रवाद की समस्या भी पूरी तरह खत्म हो जाए। हम उसी की तरफ बढ़ रहे हैं, और काफी कामयाबी हमें हासिल भी हुई है। वैसे मैं अपने अद्र्धसैनिक बलों के लिए और कुछ करता, तो मुझे और अधिक संतुष्टि होती।
आपकी कश्मीर नीति संभल नहीं रही, ऐसा माना जाता है? 
कश्मीर की समस्या बहुत पुरानी है। हम ने कई बड़े कदम उठाए हैं, पहले से वहां की स्थिति अब काफी सामान्य हुई है, लेकिन अभी बहुत कुछ करने को शेष है। मैं आश्वस्त करना चाहता हूूं अगली बार हमारी सरकार आती है, तो हम वहां की स्थिति को पूरी तरह से सामान्य बनाने में कामयाब होंगे।
कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि आप वहां पर सरकार बनाने की जल्दबाजी नहीं करते तो 
शायद स्थितियां नॉर्मल हो सकती थीं? 
तब चुनाव हुआ था और ‘सिंगल लार्जेस्ट पार्टी’ होकर पीडीपी आई थी। उसके बाद यदि कोई दूसरी पार्टी थी, तो वह भाजपा थी। चुनाव के बाद सीधे राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया जाए, तो वहां के जनादेश की यह अवमानना होती। एक सहमति बन गई कि किसी एक को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ है, तो कम से कम दो पॉलिटिकल पार्टी मिलकर यदि सरकार बना सकें, तो ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ के आधार पर वह सरकार हमें बनानी चाहिए। लेकिन यह प्रयोग, हम लोगों की जो अपेक्षा थी, उसके अनुरूप परिणाम नहीं दे सका।
जब आप लोगों ने केंद्र में हुकूमत संभाली थी, तो कहा जाता था सौ के आसपास हार्डकोर आतंकवादी घाटी में हैं। आज पांच सौ से ऊपर हैं। तब बाहर के आतंकी ही ज्यादा थे, आज घाटी के नौजवान आतंकी बन रहे हैं। इस पर सरकार क्या सोचती है? 
डिरेडिकलाइजेशन का एक सिलसिला भी हम लोगों ने प्रारंभ किया है और मैं कह सकता हूं कि पहले जितनी तेजी से डोमेस्टिक टेररिस्ट वहां पर खड़े हो रहे थे, उसमें थोड़ी कमी आई है, क्योंकि अब इस आतंकवाद को रोकने के लिए हम लोगों ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं।
कश्मीर पर आपकी पार्टी का पुराना रद्देअमल है कि अनुच्छेद 370 हटना चाहिए, लेकिन 370 नहीं हटा? 
अब ये सब ऐसे मुद्दे हैं, जिनका लक्ष्य बस यही है कि कश्मीर का विकास तेजी से होना चाहिए, नौजवानों को रोजगार मिलना चाहिए, अमन-अमान का माहौल होना चाहिए।
अयोध्या के राम मंदिर का भी एक मुद्दा है। आपके घोषणापत्र में भले ही नीचे था,                                              लेकिन था। वह पीछे रह गया? 
देखिए अब मामला न्यायालय में है, तो निश्चित रूप से हमें न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट में एक निगोशिएशन के लिए परस्पर बातचीत के माध्यम से इसे सुलझाने के लिए एक उन्होंने कमेटी बना रखी है। दोनों पक्षों के साथ बातचीत हो रही है। मुझे लगता है कि उसके परिणामों की हमें प्रतीक्षा करनी चाहिए। आपने अल्पसंख्यकों को इस बात का श्रेय दिया था कि उन्होंने देश की फिजां नहीं बिगड़ने दी। पर आपकी पार्टी के बहुत से लोग उन्हें पाकिस्तान भेजने लगते हैं, दुराव का माहौल पैदा करने की कोशिश कभी-कभी आपके कुछ नेता करते हैं, उसके लिए आप लोग अंदर के फोरम पर कुछ करते हैं? 
इस हकीकत को भारतीय जनता पार्टी अच्छी तरह समझती है कि हम भारत को एक सशक्त, स्वाभिमानी, स्वावलंबी और धनवान देश बनाना चाहते हैं, तो समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहिए। यही हमारा प्रयत्न रहता है।
आप सरकार में नंबर दो की हैसियत में हैं, आप सबसे सफल पार्टी अध्यक्ष रहे। 
अब अगले चुनाव में क्या होने जा रहा है?

मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि पहले भाजपा को 2014 में जितनी सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी, उससे कहीं अधिक सीटों पर इस बार जीत होगी और हमारे जो सहयोगी हैं, उनका भी नंबर निश्चित रूप से बढ़ने वाला हैं। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि भले ही भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिले, लेकिन सबको विश्वास में लेकर एनडीए की सरकार ही बनाएंगे।
पिछली सरकार में अकाली आपसे नाराज हुए, शिवसेना आपके खिलाफ बोलती 
रही और चंद्रबाबू नायडू तो छोड़कर ही चले गए। ये खटपट क्यों होती रही? 
मुद्दों के आधार पर ‘डिफरेंस ऑफ ओपिनियन’ हो सकती है, लेकिन आपने देखा कि हमारे सहयोगियों का नंबर 2014 में जितना था, उससे अधिक ही हुआ है, उससे कम नहीं हुआ है। सारे सहयोगी कमोबेश यदि टीडीपी को छोड़ दिया जाए,तो सभी हमारे साथ हैं।
आप इतने कॉन्फिडेंट हैं कि आप बहुमत ला रहे हैं, तो आखिर आप अपने एलाइंस 
को सीटें ज्यादा क्यों दे रहे हैं? 
ये गठबंधन हमारी मजबूरी नहीं है, हमारी ये प्रतिबद्धता है, हमारा ये ‘कंपल्सन’ नहीं, बल्कि हमारा ‘कमिटमेंट’ है। और हम जितने अधिक से अधिक लोगों को साथ लेकर चल सकें, चलें, भले ही हमको बहुमत हासिल हो, तो मैं समझता हूं कि वह ज्यादा बेहतर होगा।
तो जो सीटें आपने ज्यादा दीं, वह विनम्रता का प्रतीक है? 
अरे वे हमारे सहयोगी हैं, स्वाभाविक है कि हम उनकी भी चिंता करते हैं। वे किसी भी सूरत में आहत न होने पाएं।
ऐसा लगता है कि आपकी पार्टी विकास से ज्यादा राष्ट्रवाद, पाकिस्तान जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है?
राष्ट्रवाद तो हमारे लिए प्रतिबद्धता है, हम राजनीति करते हैं, तो राष्ट्र के लिए ही राजनीति करते हैं।
लेकिन एक उद्धत राष्ट्रवाद है? 
उद्धत राष्ट्रवाद  नहीं! राष्ट्रवाद , राष्ट्रवाद होता है। राष्ट्रवाद  कभी उद्धत नहीं होता है। बहुत संतुलित मिजाज से राष्ट्रवाद की विचारधारा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाकर रखनी पड़ती है। यह कभी उद्धत नहीं हो सकती।
पाकिस्तान क्यों आप लोगों के भाषणों में बार-बार आता है? 
पाकिस्तान हमारा पड़ोसी देश है और मैं समझता हूं कि अटल बिहारी वाजपेयी जी थे, तब भी बराबर यह कोशिश हुई कि पड़ोसी के साथ हमारे रिश्ते बेहतर होने चाहिए। उन्होंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। लेकिन विडंबना यह है कि हमारा यह पड़ोसी बराबर भारत को अस्थिर करने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता है।
आरोप है, आप लोग बाहर के मुद्दों को घरेलू मुद्दों से मिक्स कर देते हैं। पुलवामा हुआ, तो पुलवामा को मुद्दा बना दिया गया। आप खामियां दूर करने के लिए काम कर रहे होंगे, इसमें संदेह नहीं है, लेकिन बात कहीं की कहीं पहुंच गई? 
देखिए, हम पूरी सावधानी बरतते हैं। लेकिन अब यह घटना हो गई, दुर्भाग्यपूर्ण थी। इसकी बहुत ही विस्तार से हम जांच करवा रहे हैं। हम देखेंगे कि कहीं कोई कमी रह गई है, तो उसे हम लोग निश्चित रूप से दूर करेंगे।
अब जैसे आचार संहिता लगी हुई है। प्रधानमंत्रीजी ने आकर घोषणा की कि हमने अंतरिक्ष में इतना बड़ा काम किया। क्या इस तरह की घोषणाओं से बचा जा सकता था? 
मेरा यह मानना है कि यह इतना बड़ा ‘एचीवमेंट’ देश का है और हमारे वैज्ञानिकों ने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है, तो प्रधानमंत्रीजी ने अपना नैतिक दायित्व मानते हुए कल राष्ट्र के नाम संदेश जारी किया और यह सचमुच हर भारतवासी के लिए बहुत ही गौरव का विषय है।
यही अगर डीआरडीओ के वैज्ञानिक बोलते, तो ग्रेस कुछ अलग होती, क्योंकि चुनाव आचार संहिता लागू है? 
इसमें राजनीतिक निर्णय की आवश्यकता होती है। आखिर फैसला हमारे प्रधानमंत्री ने ही किया था, तभी तो आगे बढे़।
कांग्रेस कहती है कि उसके काम को आपने आगे बढ़ाया? 
देखिए, वैज्ञानिक अपना काम करते रहते हैं, चाहे सरकार किसी की भी हो, लेकिन 2012 में जो परमीशन मिलनी चाहिए थी, मिल जाती,तो यह काम तभी भारत के वैज्ञानिकों ने कर दिया होता। सवाल है कि फर्म कन्विक्शन के साथ यह फैसला यदि किया है, तो प्रधानमंत्री मोदीजी ने किया है।
पुलवामा अटैक के बाद हमारे पास पक्की जानकारी है कि पाकिस्तान के मसूद अजहर का इसमें हाथ है। पर हम उसको गिरफ्त में नहीं ले पाते, क्या कारण है? 
उसको ब्लैक लिस्ट करने की कोशिश बराबर भारत द्वारा हो रही है। मैं यह कह सकता हूं कि हम इसमें पूरी तरह असफल भी नहीं रहे। पहले संयुक्त राष्ट्र में उसको ब्लैक लिस्ट करने लिए भारत अकेले अपना प्रस्ताव रखता था, लेकिन अब फ्रांस, इंग्लैंड, अमेरिका आदि सभी देश इस प्रस्ताव को समर्थन दे रहे हैं।
पर यह ‘आईवाश’ नहीं है? हाफिज सईद आनंद से घूम रहा है, पाकिस्तान ने कह दिया कि हमारे यहां दाऊद है ही नहीं। जैश पर पाबंदी लगी, तो किसी और नाम से शुरू हो जाएगा? 
अब अंतरराष्ट्रीय दबाव भी पाकिस्तान पर बढ़ रहा है। यह भी हमारी कूटनीतिक सफलता रही है। पहली बार ऐसा हुआ है कि ‘ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन’ ने पाकिस्तान के विरोध के बावजूद हमारी विदेश मंत्री सुषमाजी को ससम्मान आमंत्रित किया।
अगर पाकिस्तान बाज नहीं आता, तो क्या भारत ने एयर स्ट्राइक से आगे की
 किसी भूमिका की तैयारी कर रखी है? 
इतना ही मैं कहना चाहता हूं कि पाकिस्तान को अब अपनी इन गतिविधियों को रोकना ही होगा।
आपने कहा था कि एक तीसरी स्ट्राइक भी हमने की थी। तो बताइए क्या की थी?
मैंने सच कहा था, लेकिन उसको मैं बताऊंगा नहीं।
आपको सर्वाधिक सीटें उत्तर प्रदेश से मिली थीं। आज वहां बड़ा मजबूत गठबंधन है। प्रियंका गांधी भी एक फैक्टर हो सकती हैं। क्या आपकी 73 सीटों पर खतरा है? 
हमलोग तो 73 से 74 करने की कोशिश में हैं। हमारा एफर्ट है कि हम 73 से 72 न होने पाएं, बल्कि 73 से 74 हों।
2014 के चुनाव में राज्यों में छोटे-छोटे दल एकजुट नहीं हुए थे। इस बार एकजुट हैं। क्या वे असर नहीं डालेंगे?
महागठबंधन की बात होती रही है। कांग्रेस के साथ कितने लोग जुडे़? महागठबंधन की बात तो छोड़ दीजिए, जहां पर छोटा-मोटा गठबंधन भी है, उसमें भी कई गांठें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि यदि भाजपा को कम सीटें मिलती हैं, तो सहयोगी 
दल प्रधानमंत्री पद के लिए किसी और नाम के लिए दबाव बना सकते हैं?
लोग ख्याली पुलाव पका रहे हैं कि हमें स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा। न केवल भाजपा, बल्कि एनडीए के सभी घटक दल मोदीजी को निर्विवाद तौर पर नेता मानते हैं। जन सामान्य का भरोसा प्रधानमंत्री के प्रति बढ़ा है। यहां मैं स्पष्ट कर दूं कि मोदीजी के अलावा कोई और प्रधानमंत्री नहीं हो सकता।

No comments