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राष्ट्र-चिंतन : क्यों बना पाकिस्तान चुनावी प्रश्न ?

लोकसभा चुनाव में पाकिस्तान चुनावी प्रश्न क्यों बन गया? पाकिस्तान का चुनावी प्रश्न किसकी किस्मत चमकायेगी, किसकी किस्मत को को डूबायेगी? एक ओर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार पाकिस्तान के प्रश्न को गर्मी दे रहे हैं और कांग्रेस सहित अपने सभी राजनीतिक विरोधियों पर पाकिस्तान परस्ती का आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी पाकिस्तान परस्ती परलक्षित होने वाले कोई न कोई बयान देकर चुनावी राजनीतिक को चकित कर रहे हैं, उफान भी पैदा कर रहे हैं। सोशल मीडिया भी किसी न किसी रूप में पाकिस्तान को केन्द्र मे रखे हुए हैं। खासकर पाकिस्तान केन्द्रीत सोशल मीडिया लगातार नरेन्द्र मोदी के खिलाफ आग उगल रहा है और कह रहा है कि नरेन्द्र मोदी शांति और भाईचारे का दुश्मन है, खलनायक है, किसी भी परिस्थिति में इस लोकसभा का चुनाव नरेन्द्र मोदी को नहीं जीतना चाहिए, नरेन्द्र मोदी को हराना जरूरी है। 
         चुनाव के दौरान जब ऐसी चर्चा पाकिस्तान केन्द्रीत सोशल मीडिया के अंदर होगी, जब ऐसी चर्चा पाकिस्तान की राजनीति में होगी और जब ऐसी चर्चा पाकिस्तान के आंतकवादी संगठनों के अंदर होगी तब फिर भारत केन्द्रीत सोशल मीडिया में ऐसी चर्चा  के खिलाफ गर्मी कैसे नहीं होगी, क्यों नहीं होगी? भारत केन्द्रीत सोशल मीडिया भी पाकिस्तान केन्दीत सोच पर उफान पैदा किये हुए है।भारतीय केन्द्रीत सोशल मीडिया में यह प्रश्न उठ रहा है कि पाकिस्तान की राजनीति प्रक्रिया, पाकिस्तान के आंतकवादी संगठन नरेन्द्र मोदी को लोकसभा का चुनाव क्यों हरवाना चाहते हैं, क्या भारत के जनमत को पाकिस्तान प्रभावित करेंगा, सबसे बडी बात यह है कि गैर भाजपा पार्टियां पाकिस्तान की ही भाषा क्यों बोल रही हैं, भारत की गैर भाजपा पार्टियां पाकिस्तान के पक्ष में बयान क्यों देती हैं, क्या यह मुस्लिम तुष्टीकरण का हिस्सा है, क्या यह सब मुस्लिम वोट हासिल करने का हिस्सा है? सही तो यह है कि गैर भाजपा पार्टियां यह सोचने और समझने की कोशिश तक नहीं करती है, कि भारत में पाकिस्तान हमेशा एक दुश्मन के तौर पर खडा रहता है और भारतीय जनमानस पाकिस्तान की आतंकवादी नीति के कारण पाकिस्तान से घृृणा करता है फिर भी पाकिस्तान परलक्षित बयान देने से गैर भाजपा पार्टियां हटती नहीं हैं।
इधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पत्रोदा और समाजवादी पार्टी के बडे नेता रामगोपाल यादव के बयान ऐसे आये हैं,  जिससे साफ जाहिर होता है कि उनकी मंशा पाकिस्तान को बचाने और भारत को खलनायक मानने जैसा है। वायु स्टाइक को लेकर प्रमाण मांगने और पाकिस्तान का बचाव करने के लिए गैर भाजपा पार्टियां जो अभियान चला रखी थी वह राजनीतिक अभियान लगातार जारी है, रूक नहीं रहा है, लोकसभा चुनाव के दौरान भी चुनावी राजनीति को गर्मी प्रदान कर रहा है। सैम पत्रोदा कांग्रेस के बडे नेता रहे हैं, कांग्रेस के रणनीतिकार रहे हैं, ये राजीव गांधी के साथ काम किये हैं, अभी भी इनकी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के सलाहकार के तौर गिनती होती है। सैम पत्रोदा ने यहनहीं  देखा या समझा नहीं कि अभी चुनाव का समय है, राहुल गाध्ंाी-प्रियंका गांधी नरेन्द्र मोदी को हराने के लिए और कांग्रेस को सत्ता में फिर से स्थापित करने के लिए हाडतोड मेहनत कर रहे हैं, राष्टवाद और नरम हिन्दुत्व का हथकंडा भी अपनाये हुए हैं, ऐसी परिस्थति मे उनके बयान कांग्रेस के लिए हानिकारक होंगे। सैम पत्रोदा ने कहा था कि एक फुलवामा जैसे एक आतंकवादी घटना से पूरे पाकिस्तान को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। जबकि समाजवादी पार्टी के बडे नेता रामगोपाल ने कह डाला कि वायु स्टाइक के माध्यम से मुसलमानों को हथकंडा बनाया जा रहा है। सिर्फ कांग्रेस या समाजवादी पार्टी की ही बात नहीं है। नरेन्द्र मादी विराधी सभी राजनीतिक पार्टियां अभी भी वायु स्टाइक का सबूत मांगने और पाकिस्तान का बचाव करने से पीछे नहीं है। यह एक आत्मघाती चुनावी नीति है। इस आत्मघाती चुनावी रणनीति के दुष्परिणाम की उम्मीद कैसे नहीं हो सकती है?
पाकिस्तान और हिन्दुत्व के प्रश्न पर भाजपा और नरेन्द्र मोदी को पराजित नहीं किया जा सकता है, पाकिस्तान और हिन्दुत्व के प्रश्न पर भाजपा और नरेन्द्र मोदी को केन्द्रीय सत्ता से नही हटाया जा सकता है। ऐसी नीति रखने वाले विपक्ष की खुशफहमी ही कही जा सकती है। पाकिस्तान विरोध और हिन्दुत्व तो भाजपा और पाकिस्तान के लिए प्राणवायु है। पाकिस्तान के विरोध के आधार पर और हिन्दुत्व के पक्ष में मजबूरी के साथ खडा होने के आधार पर भाजपा व नरेन्द्र मोदी हमेशा से शक्ति पायी है, हमेशा से अपने विरोधियों को पराजित करने के लिए जनमत हासिल किया है। पिछले लोकसभा की राजनीतिक स्थिति को याद कीजिये। पिछले लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी खूब दहाडते हैं, पाकिस्तान का विरोध और हिन्दुत्व के प्रति समर्पण को लेकर इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करते थे। जाहिर तौर पर पिछला लोकसभा चुनाव नरेन्द्र मोदी पाकिस्तान विरोध और हिन्दुत्व के प्रति समर्पण के आधार पर जीता था। इस लोकसभा चुनाव में नरेन्द मोदी पाकिस्तान के विरोध को अग्नि प्रदान कर रहे हैं और पाकिस्तान परस्ती को आधार बना कर कांग्रेस और अपने अन्य विरोधियों को न केवल आलोचना के केन्द्र में रखे हुए हैं, बल्कि जनमत को भी झकझौर रहे हैं।
भाजपा और नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रश्न पर विपक्ष की कैसी घेराबंदी कर रखी है, यह भी जगजाहिर है। नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि वायु स्टाइक को लेकर पाकिस्तान मे खलबली है, पाकिस्तान में हाहाकार मचा पर भारत में विपक्ष उनसे प्रमाण मांग रहा है। खासकर भाजपा के प्रवक्ताओंने यहां तक कह डाला कि कांग्रेस को भारत को छोडकर पाकिस्तान में जाकर राजनीति करनी चाहिए, पाकिस्तान में चुनाव लडना चाहिए। सैम पत्रोदा जैसे लोग मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। भाजपा कहती है हमने दो बार सैनिक स्टाइक कर पाकिस्तान की गर्दन मरोडी है, अब पाकिस्तान ऐसी गुस्ताखी करने पर सौ बार सोचेगी, अगर ऐसी गुस्ताखी पाकिस्तान ने फिर कि तो फिर उसे ऐसा जवाब मिलेगा जिससे उबरने में पाकिस्तान को सदियों लग जायेगे। समस्या यह है कि कांग्रेस के पास सिर्फ सैम पत्रोदा ही नहीं है बल्कि काग्रेस के पास एक पर एक नेता ऐसा हैं जो अभी सबूत मांग कर कांग्रेस की जडों में मटठा डाल रहे हैं और कांगेस की चुनावी संभावनाओं को कुचल रहे हैं। ऐसे कांग्रेसी नेताओं में दिग्विजय सिंह, मणिशंकर अय्यर, मनीष तिवारी जैसे नेता शामिल हैं। 
भारत की जनता भी पाकिस्तान के प्रशन पर आक्रोशित है। भारत की जनता यह मानती है कि पाकिस्तान हमेशा से भारत की एकता और अखंडता को कुचलने की कोशिश करता है, पाकिस्तान की आतंकवादी नीति के कारण भारत कई दशकों से लहूलुहान है फिर भी भारतीय राजनतिक दल पाकिस्तान के पक्ष में खडा क्यों हो जाते है? आम जनता में यह बात फैलाने की भी कोशिश हो रही है कि अगर नरेन्द्र मोदी चुनाव हारते हैं तो फिर पटाखे पाकिस्तान में फूटेंगे, होली-दिवाली पाकिस्तान में मनेगी, पाकिस्तान के आतंकवादी खुश होंगे। पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों को भारत में आतंकवाद का खेल खेलने में आसान होगा। सबसे बडी बात यह है कि देश का बहुसंख्यक वर्ग विपक्ष की पाकिस्तान परस्ती को अपने विरोध में मानता है। यहां एक प्रश्न यह भी है कि देश का बहुसंख्यक वर्ग की नयी जागरूकता भाजपा और नरेन्द्र मोदी के साथ खडी है। विपक्ष मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए बहुसंख्यक वर्ग की भावनाओं को आहत करने का कोई अवसर नहीं छोडता है। 
जने-अनजाने में विपक्ष नरेन्द्र मोदी के जाल में फंस चुका है। नरेन्द्र मोदी तो यही चाहते है कि विपक्ष पाकिस्तान परस्ती दिखाते रहे, उनसे सबूत मांगते रहे ताकि जनता उनके खिलाफ खडी हो जाये। विपक्ष के पास नरेन्द्र मोदी के खिलाफ सैकडों प्रश्न हैं जिस पर सफल चुनावी घेराबदी हो सकती है। विपक्ष के पास बेरोजगारी, बढता हुआ भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याएं है । इन समस्याओं पर विपक्ष पाकिस्तान को तरजीह क्यों देता है? पाकिस्तान का प्रश्न विपक्ष के लिए घाटे का प्रश्न है। पर विपक्ष इस प्रश्न की वास्तविकता को समझने के लि तैयार नहीं है। कभी सोनिया गांधी ने नरेन्द्र मोदी को सहांरक कहकर मोदी को अपनी छवि चमकाने का अवसर प्रदान की थी, गुजरात में हिन्दुओं के खिलाफ अपमानजनक अभियान चला कर भाजपा को शक्ति प्र्रदान की थी। निष्कर्ष यही है कि नरेन्द्र मोदी को ही पाकिस्तान का प्रश्न चुनावी लाभ देगा। 
                                                                                                                                विष्णुगुप्त


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