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राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि नरेंद्र मोदी फैक्टर कमजोर नहीं हुआ


राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि नरेंद्र मोदी फैक्टर कमजोर नहीं हुआ है और कर्नाटक में आगामी लोकसभा चुनाव में इसकी निर्णायक भूमिका होगी। राजनीतिक विश्लेषक संदीप शास्त्री ने बताया, ''2014 में अगर भारत के किसी राज्य में मोदी फैक्टर चला तो वह कर्नाटक ही है। तब 10 में से छह मतदाताओं ने मोदी के लिये मतदान किया था जबकि देश में यह संख्या 10 में से तीन थी। इस बार के लोकसभा चुनाव में भी मोदी फैक्टर निर्णायक भूमिका निभायेगा।
उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया कि मैसूर संभाग में जदएस और कांग्रेस के बीच पुराने बैर को देखते हुए इस चुनाव में मोदी फैक्टर के अलावा जदएस-कांग्रेस का गणित और उनकी राजनीतिक तरातल भी धरातल पर निर्णायक भूमिका निभायेगी।
उन्होंने कहा, ''गठबंधन का गणित कांग्रेस और जदएस गठजोड़ के पक्ष में दिखता है हालांकि यह देखना होगा कि क्या उनकी पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक धरातल पर खासकर मैसूर संभाग में इस गठबंधन को स्वीकारेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा कर्नाटक में 2014 का अपना प्रदर्शन दोहरा पायेगी, इस पर शास्त्री ने कहा कि चुनाव में कोई पार्टी को प्रचंड बहुमत नहीं मिलेगा।
भाजपा भी 2014 में 17 सीटें जीतने के अपने प्रदर्शन को दोहरा नहीं पायेगी। राजनीतिक विश्लेषक हरीश रामास्वामी ने कहा कि मोदी के चयन में भाजपा का भाग्य बदलने की संभावना है, जिसे पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी देखा गया है।
उन्होंने कहा, ''ऐसे पर्याप्त आंकड़े हैं जो यह दिखाते हैं कि मोदी कर्नाटक में बड़ा फैक्टर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी ने जब रैलियों को संबोधित करना शुरू किया तो भाजपा के लिये चीजें बड़ी तेजी से बदलनी शुरू हुई थीं जबकि इससे पहले पार्टी के लिये परिस्थितियां कठिन थीं।

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