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जदयू की पेंच: आखिर क्यों कहकशा-रामनाथ पर भारी पड़े हरिवंश?

कमलेश पांडे 
नई दिल्ली। राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए जनता दल यूनाइटेड के राज्यसभा सदस्य हरिवंश सिंह को राजग प्रत्याशी बनाए जाने से जदयू में पिछले कई दिनों से जारी रस्साकशी अब थम गईं है।    हालांकि इस होड़ में शामिल राज्यसभा सदस्यों- रामनाथ ठाकुर, आरसीपी सिंह और कहकशा प्रवीण आदि को मिर्ची लग चुकी हैै, क्योंकि बात बनतेे-बनते बिगड़ गई। लेकिन सीएम नीतीश कुुुमार के सामने मुंह खोलने की हिम्मत किसी की भी नहीं है। इसलिए दबी जुबान में ही सही, पर वंचित लोग अपनी अपनी  भड़ास जरूर निकाल रहे हैं।
दरअसल, सूबे के सियासी समीकरणों और राजग हित के मुताबिक जदयू आलाकमान और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने भरोसेमंद नेताओं से विचार विमर्श करके अत्यंत पिछड़ी जाति से आने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के पुत्र और राज्यसभा सदस्य रामनाथ ठाकुर को राज्यसभा के उपसभापति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला कर लिया था। लेकिन ऐन वक्त पर एक अंग्रेजी दैनिक में एक विवादास्पद खबर प्रकाशित होने से सीएम श्री कुमार को अपना फैसला बदलने को बाध्य होना पड़ा।
बता दें कि रामनाथ ठाकुर के नाम को जब बीजेपी की ओर बढ़ाया गया तो वह उनकी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं हुई। इसी बीच एक अंग्रेजी दैनिक की खबर में मुजफ्फरपुर में लड़कियों के शोषण के मामले में बदनाम प्रातः कमल अखबार के संपादक ब्रजेश ठाकुर और बिहार के पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री रामनाथ ठाकुर के पारिवारिक सम्बन्धों की चर्चा सामने आ गई, जो श्री कुमार को नागवार गुजरी। हालांकि रामनाथ ठाकुर के लोगों को आशंका है कि उनके खिलाफ उनकी ही पार्टी के नेता ने यह खबर प्लांट करवाई ताकि उनका नाम कट जाए और वही हुआ भी।
बताया जाता है कि उसके बाद मुख्यमंत्री श्री कुमार ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सह पार्टी प्रवक्ता केसी त्यागी और युवा जद यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार आदि नेताओं से चर्चा करके उनके पसंदीदा और निर्विवाद नेता तथा पार्टी महासचिव हरिवंश सिंह के नाम का ऐलान कर दिया, क्योंकि बीजेपी इस नाम पर रजामंद हो गई। गौरतलब है कि श्री सिंह हिंदी दैनिक प्रभात खबर के सफल सम्पादक रह चुके हैं और साफ-सुथरी छवि के राजनेता हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह के प्रेस सलाहकार रह चुके हैं, जिससे समकालीन दिग्गज नेताओं पर उनकी व्यक्तिगत पकड़ है। इसलिए राज्यसभा में एनडीए के अल्पमत में होने के बावजूद उनकी जीत के आसार प्रबल हैं।
मजे की बात तो यह है कि रामनाथ ठाकुर के नाम पर विचार से भी पहले सीएम श्री कुमार ने सूबे में अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने के लिए अपनी पार्टी की ओर से राज्यसभा के उपसभापति के पैनल में शामिल कहकशा प्रवीण का नाम बीजेपी को सुझाया था जिस पर बीजेपी नेतृत्व की कड़ी आपत्ति के बाद उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उसके बाद सीएम श्री कुमार ने अत्यंत पिछड़ा वर्ग के नेता श्री ठाकुर के नाम को आगे बढ़ाना चाहा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था जिसकी चर्चा हम ऊपर में कर चुके हैं।
दरअसल, इस पद हेतु हरिवंश सिंह के चयन को सर्वोत्तम इसलिए भी माना जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री और दिग्गज समाजवादी नेता चंद्रशेखर सिंह के प्रेस सचिव रहने की वजह से  बीजू जनता दल नेता और उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, अकाली दल नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे आदि कई क्षेत्रीय नेताओं  का नैतिक समर्थन राजग उम्मीदवार हरिवंश सिंह के साथ रहेगा, जिससे वो इस सीट को आसानी से निकाल लेंगे। 
जहां तक जदयू की अंदरूनी राजनीति का सवाल है तो हरिवंश सिंह के चयन से पूर्व आईएएस और राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह का कद थोड़ा कम हुआ है। हालांकि अभी भी उनको केंद्र में मंत्री बनाए जाने के आसार प्रबल हैं। यह बात अलग है कि पूर्णिया से जदयू के लोकसभा सदस्य संतोष कुशवाहा की किस्मत का सितारा फिलवक्त बुलंद है। इस पूरे प्रकरण में उन्होंने छुपे रुस्तम की भूमिका निभाई है। 
जानकर बताते हैं कि  रामनाथ ठाकुर और आरसीपी सिंह जैसे राज्यसभा सदस्यों से इतर लोकसभा सदस्य के रूप में वे अपनी शह-मात वाली नेटवर्किंग को काफी मजबूत बना लिए हैं। और सम्भव है कि यदि मोदी सरकार में दो राज्यमंत्रियों को निकट भविष्य में जगह मिलेगी तो उनका नाम भी उसमें शामिल रहेगा। क्योंकि न केवल दिल्ली पार्टी लॉबी बल्कि पटना पार्टी लॉबी में भी वो अपनी पकड़ लगातार मजबूत बना रहे हैं। पार्टी के कई सवर्ण नेताओं का साथ भी संतोष कुशवाहा को मिल रहा है, क्योंकि व्यवहारिक राजनीति करते हैं।


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