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...तो शनिदेव की तिरछी नजर से नप गए दाती महाराज, दागदार हुआ शनिधाम



लीजिए, अब देश की राजधानी दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके में बने शनिधाम के 'काम उपासक' संचालक दाती महाराज पर अपनी ही कथित शिष्या से दुष्कर्म करने का मुकदमा दर्ज हो गया। उसके बाद से तो महाराज भागे-भागे फिर रहे हैं और दो राज्यों की पुलिस उनके पीछे-पीछे। हालांकि उनके दो और अनुयायी भी इस मामले में आरोपित हैं, लेकिन दाती बाबा के हाइप्रोफाइल सम्बन्धों के चलते यह मामला भी हाइप्रोफाइल हो चुका है। आरोप है कि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में भी पुलिस को पांच दिन लगे जिससे बाबा को फरार होने में मदद मिली। यह अपने आपमें एक गम्भीर बात है और मोदी के मातहत प्रशासन से तो ऐसी अपेक्षा कतई नहीं की जा सकती है।
दरअसल, कैटरिंग के काम से लेकर महामंडलेश्वर बनने और करोड़ों का आध्यात्मिक साम्राज्य खड़ा करने वाले दाती बाबा की क्रोधलीला से तो मैं पिछले साल ही उनके आश्रम में तब रूबरू हुआ था जब उनके द्वारा आयोजित एक विशाल संत समागम में संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत संघ-बीजेपी के कई दिग्गज महानुभाव वहां पधारे थे जिसके चलते मैं भी अपने एक अभिन्न मित्र के साथ अनायास ही वहां पहुंचा था। उसी दिन रात में कुछ देर तक रुक कर मैंने उनके चेलों द्वारा 'सड़क छाप' साधुओं पर किया जाने वाला अत्याचार आंखों देखा था, जिससे उसके प्रति मेरी धारणा बदल गई। मुझे लगा कि आस्था और भक्ति के केंद्रों में निज वर्चस्व स्थापित करने हेतु शायद यह भी जरूरी होगा।
वाकई मैं जिन लोगों के साथ शनिधाम गया था वो भी बाबा के अनन्य भक्त थे, और बीजेपी के कट्टर अनुयायी। इसलिए उनके साथ ही लौटने के चक्कर में कुछ ऐसी अविश्वसनीय घटनाओं का दीदार कर लिया, जिसके बाद ऐसे सन्तों और उनके मठों के प्रति घृणा का भाव तो नहीं रख पाया लेकिन मेरा अगाध प्रेम भी लगभग समाप्त हो गया। अब तो हर मठ और उसके जमघट को मैं शक की नजर से देखने का आदी हो गया हूँ, क्योंकि उस रात का दृश्य ही डरावना और चिंतित कर देने वाला था। सन्तों को उनके जमात के आधार पर नोट और जोरदार थप्पड़ दोनों बांटे जा रहे थे और वहां के कमरों की ओर धकियाकर भेजा जा रहा था।
हालांकि यह क्रोधी बाबा, कामी महाराज भी होगा इसका अंदाजा मुझे तब बिल्कुल नहीं था, क्योंकि विशाल संत समागम और शाही भंडारा के माहौल में इतना गिर कर सोचा भी नहीं जा सकता था। जहां संघ के विचारक इंद्रेश जी, केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह, पश्चिमी उत्तरप्रदेश के एक-दो विधायक भी हों, वहां इतनी घटिया बातें कोई भी नहीं सोच सकता। लेकिन इन सबों के वहां से जाने और भंडारा खाने के बाद जब सन्तों की गिनती शुरू हुई और उन्हें विदाई देकर शनिधाम के कथित 'कैद खानों' में भेजे जाने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई, तो फिर वहां कहीं खुशी देखने को मिली, तो कहीं गम। फिर मेरे अंदर का पत्रकार जाग उठा और उन दोस्तों के साथ मैंने पूरी घटना को अपनी नजरों में कैद कर लिया, जिसका आज खुलासा कर रहा हूँ।
हालांकि तब की कुछ झलकियां भी मैंने अपने फेसबुक फ्रेंड्स से साझा की थी। लेकिन अब जो इनकी कामलीला प्रकाश में आई है वह कामप्रेमी साधु-संतों आशाराम, गुरमीत राम रहीम, नारायण साईं, बाबा रामपाल, स्वामी नित्यानन्द आदि की कामलीलाओं का महज विस्तार मात्र नहीं तो क्या है? सवाल तो यह भी है कि दिल्ली पुलिस की नाक के नीचे ऐसा कुकृत्य चलता रहा और उसे भनक नहीं लग सकी! या फिर किसी अन्य कारणों से वह खामोश रही, यह भी जांच का विषय है। मेरा मानना है कि दिल्ली और राजस्थान पुलिस यदि इस मामले की सही जांच करे तो एक बड़े सभ्य सेक्स रैकेट का भी भंडाफोड़ हो सकता है, क्योंकि इस मायावी दिल्ली के सीने में बहुत से ऐसे राज दफन हैं जिनका खुलासा होना देशहित में बहुत जरूरी है।
यह कैसी बिडम्बना है और कितनी चिंता की बात है कि दाती महाराज के खिलाफ दिल्ली पुलिस को मामला दर्ज करने में पांच दिन लग गया, जिसका फायदा उठाकर वह फरार हो गया। अब उसकी गिरफ्तारी बहुत जरूरी है ताकि उसके विराट कामी नेटवर्क का भी खुलासा हो सके। क्या आपको पता है कि इन कामी-क्रोधी सन्तों के दरबार में दिग्गज नेताओं-अधिकारियों-धनाढ्य लोगों की लगी हाजिरी और किसी भी भयावह खुलासे के बाद उस नजरिए से की जाने वाली विस्तृत जांच की कोई भी  गहन रिपोर्ट आजतक देशवासियों से साझा की गई है? स्वाभाविक सवाल है कि यदि नहीं तो क्यों नहीं साझा की गई, यह चिंता की बात है।
जाहिर है, जबतक नेताओं, अधिकारियों और भ्रष्ट पेशेवरों में सांठ-गांठ रहेगी तब तक ऐसे मामलों से सिर्फ पर्दा उठेगा, लेकिन वैसी निर्णायक कार्रवाई कभी नहीं होगी जिससे ऐसे सभ्य दुष्कर्मों पर हमेशा के लिए रोक लग सके। वाकई कॉल गर्ल्स की फाइव स्टार संस्कृति में सभ्य लोगों से निर्णायक कार्रवाई की अपेक्षा करना भी बेमानी है। लेकिन ऐसे दागी सन्तों और धर्मनिरपेक्षता का चोंगा ओढ़कर भांति भांति के कुकर्म करने वाले नामचीन लोगों को क्या पता कि संतत्व में ब्रह्मचर्य की संस्कृति को बढ़ावा देने वाले सनातन धर्म के सही  अनुयायियों पर इनकी नाजायज हरकतों से क्या बीतती होगी जब वो टीवी पर, अखबारों में और सोशल मीडिया पर इतनी घिनौनी बहस सुनते होंगे।
खैर, इतना तो आपको मानना ही पड़ेगा कि न्यायप्रिय और धर्मनिष्ठ ग्रहदेव शनि महाराज ने अपने नाम पर चलाए जा रहे शनिधाम के कथित अनन्य उपासक दाती महाराज को भी समय आने पर नहीं बख्शा और पाप का घड़ा भरते ही ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि अब तक दूसरों पर जमकर आशीर्वाद लुटाने वाला कामपिपासु बाबा अब देश की न्याय व्यवस्था से खुद पर रहम करने की भीख मांगेगा। यह कितना अजीबोगरीब है कि अबतक भगवान राधा-कृष्ण के नाम पर उनके भक्त तो कहीं कहीं रासलीला रचाते ही थे, लेकिन अब शनिदेव जैसे कर्मफल प्रदाता ग्रह देवता के नाम पर भी कोई कामलीला रचएगा, ऐसा सपने में भी नहीं सोचा जा सकता। फिर भी, शनिदेव ने जब पीड़िता को इस कुकृत्य का विरोध करने और भंडाफोड़ करने का जब आत्मबल दिए हैं तो पूरी उम्मीद है कि भारतीय न्याय व्यवस्था उसके साथ न्याय करेगी और कामलीला रचाने वाले काले-कलूटे दाती बाबा दण्डित भी होंगे पहले के बदनाम सन्तों की अगली कड़ी के तौर पर।
                                                                                           कमलेश पांडे, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

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