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थाली से प्याली तक मिलावट ही मिलावट

 बाल मुकुन्द ओझा

मिलावट ने रसोई से देश तक को प्रदूषित कर रखा है। मिलावट पर हर पखवाड़े चर्चा का बाजार जरूर गर्म रहता है। देश और प्रदेश की सरकारें मिलावट के खिलाफ अभियान तेज करने की बात अपने कागजों और बयानों में रह रह कर करती है मगर धरातल पर उसका असर देखने को नहीं मिलता। फलस्वरूप मिलावट का धंधा आगे बढ़ता ही रहता है। 
खाद्य पदार्थों में अशुद्ध, सस्ती अथवा अनावश्यक वस्तुओं के मिश्रण को मिलावट कहते हैं। आज समाज में हर तरफ मिलावट ही मिलावट देखने को मिल रही है। पानी से सोने तक मिलावट के बाजार ने हमारी बुनियाद को हिला कर रख दिया है। भोज्य पदार्थों में जहरीले रसायन और अन्य खतरनाक चीजें मिलाकर हमारे जीवन और स्वास्थ्य से सरे आम खिलवाड़ किया जा रहा है। रोजमर्रा में काम आने वाली वस्तुओं का आजकल शुद्ध रूप में मिलना दूभर हो गया है। अनाज से लेकर दूध, दही, घी, पनीर,सब्जी,मसाले,आटा, तैयार फूड, ड्राईफ्रूट्स, मैदा, तेल और फल आदि  में मिलावट हो रही है। मिलावटियों ने जीवन रक्षक दवाइयों तक को नहीं छोड़ा। ऐसा कोई पदार्थ नहीं है जो जहरीले कीटनाशकों और मिलावटों से मुक्त हो। 
 मुनाफाखोरी करने वाले लोग रातोंरात धनवान बनने का सपना देखते हैं। अपना यह सपना साकार करने के लिए वे बिना सोचे-समझे मिलावट का सहारा लेते हैं। सस्ती चीजों का मिश्रण कर सामान को मिलावटी कर महंगे दामों में बेचकर लोगों को न केवल धोखा दिया जाता है, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी किया जाता है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से प्रतिवर्ष हजारों लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार होकर जीवन से हाथ धो बैठते हैं। मिलावट का धंधा हर तरफ देखने को मिल रहा है। दूध में मिलावट से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों तक ने मिलावट के बाजार पर अपना कब्जा कर लिया है।
सत्य तो यह है कि हम जो भी पदार्थ सेवन कर रहे हैं चाहें वे खाद्य पदार्थ हो या दूसरे, सब में मिलावट ही मिलावट हो रही है। मिलावट ने अपने पैर जबरदस्त तरीके से फैला लिए हैं। दूधिए की मिलावट तो एक उदाहरण के रूप में है। मगर आज हर वस्तु में मिलावट से हमारा वातावरण प्रदूषित और जहरीला हो उठा है। बाजार में पपीता, आम और केला, सेव अनार जैसे फलों को कैल्शियम कार्बाईड की मदद से पकाया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार यह स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। फलों को सुनहरा बनाने  के लिए पैराफीन वैक्स भी लगाया जाता है। इन  फलों को खाने से  कैंसर और डायरिया जैसी बीमारियां होती है। डेयरी और कृषि उत्पादों-विशेषकर हरी सब्जियों में ऑक्सिटोसिन का खूब  इस्तेमाल हो रहा है।
बाजार में मिलने वाली सब्जियों और फलों को रसायन के माध्यम से रंग-बिरंगा कर उपभोक्ताओं को आकर्षित किया जाता है। मटर और परवल को हरे रंग से हरा भरा किया जाता है। तरबूज में इंजेक्शन तो आम बात हो गई है। आम, केले, मुसंबी तक को सरे आम रसायन और इंजेक्शन से पकाया और तैयार किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। सीमेंट में राख, चाय में रंगा हुआ लकड़ी का बुरादा, जीरे में घोड़े की लीद, खाने के रंगों में लाल-पीली मिट्टी, खाद्य तेलों में दूसरे सस्ते और अखाद्य तेलों की मिलावट खूब हो रही है। एक अनुमान के अनुसार बाजार में उपलब्ध लगभग 30 से 40 प्रतिशत समान में मिलावट होती है । खाद्य पदार्थों में मिलावट की वस्तुओं पर निगाह डालने पर पता चलता है कि मिलावटी सामानों का निर्माण करने वाले लोग कितनी चालाकी से लोगों की आँखों में धूल झोंक रहे हैं और इन मिलावटी वस्तुओं का प्रयोग करने से लोगों को कितनी कठिनाइयाँ उठानी पड़ रही हैं । देश में दूध के नाम पर लोगों को जहर परोसा जा रहा है। दूध में यूरिया, स्टार्च, खाने का सोडा और डिटर्जेंट मिलाए जाने की बात सामने आई है।
        हमारे देश में मिलावट करने को एक गंभीर अपराध माना गया है। मिलावट साबित होने पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 272 के तहत अपराधी को आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। मगर बहुत कम मामलों में सजा और जुर्माना हो पाता है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से आदमी अनेक प्रकार की बीमारियों का शिकार हो जाता है। पेट की असाध्य बीमारियों से लेकर कैंसर तक का रोग लग जाता है। अंधापन और अपंगता को भी झेलना पड़ता है। मिलावट साबित होने कई बार छोटे-मोटे मिलावटखोरों की पकड-धकड़ के समाचार अवश्य पढ़ने और सुनने को मिल जाते हैं मगर मिलावट का थोक व्यापार करने वाले लोग अब तक कानून की पहुंच से दूर हैं।
कुछ अध्ययनों से पता चला है कि भारत में बावन प्रतिशत बीमारियां मिलावटी खान-पान की वजह से हो रही हैं। सरकार को कानून के प्रावधानों को और सशक्त बनाने के साथ निगरानी तंत्र को मजबूत करना चाहिए। मिलावट के आतंक को रोकने के लिए सरकार को जन भागीदारी से सख्त कदम उठाने होंगे।

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